Tulsi Vivaah कब होता है तुलसी विवाह विस्तारपूर्ण जानकारी

Tulsi Vivaah Ki Katha Pujan or Tulsi Vivaah Kab Manay Jata Hai Tulsi Vivaah Geet and Tulsi Mata Ki Aarti tulsi vivaah se sambandhit puri jankari hindi me

0

Tulsi Vivaah Kab Manaya Jata Hai Puri Jankari in Hindi – हेलो दोस्तो गंगा ज्ञान पर आप सब का फिर से स्वागत है आज के इस पोस्ट में हम आपको Tulsi Vivaah के बारे में विस्तार पूर्ण बताने वाले हैं। अगर आप भी जानना चाहते हैं तुलसी विवाह के बारे में तथा Tulsi Vivaah Vidhi, Subh Muhrut, Tulsi Vivaah Geet के बारे में तो हमारे इस पोस्ट को जरूर पढ़ें और अपने दोस्तों के साथ शेयर करें।

tulsi-vivaah

हिन्दू धर्म में तुलसी विवाह को महत महत्व दिया गया है। शास्त्रों के अनुसार कहा जाता हैं कि अपने जीवन में तुलसी विवाह आवश्य करना चाहिए। कहा गया है कि इस दिन व्रत रखने का भी विधान हैं और बहुत महत्व हैं। इससे पूर्व जन्म के पाप समाप्त हो जाते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती हैं। Tulsi Vivaah Kab Hai और तुलसी विवाह के विस्तार पूर्ण जानकारी हिंदी में जानने के लिए हमारे इस पोस्ट पढ़े और आपने दोस्तो के साथ शेयर कर सकते हैं।

Tulsi Vivaah Kab Hota Hai?

कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को कार्तिक स्नान करके तुलसी जी और शालिग्राम जी का विवाह तुलसी शालिग्राम विवाह किया जाता हैं। इसी को तुलसी विवाह कहते हैं। इसका व्रत कार्तिक शुक्ल पक्ष से शुरु हो जाता हैं। और नवमी से एकादशी तक अखण्ड जोत जलाए जाते हैं। शालिग्राम जी भगवान विष्णु के प्रतिरूप हैं।

इसे भी पढ़े –

Tulsi Mata को विष्णु प्रिया भी कहा जाता है और तुलसी और विष्णु को पति-पत्नी के रूप में भी माना जाता हैं तुलसी के बिना भगवान विष्णु की पूजा और भोग अधूरी मानी जाती हैं। तुलसी विवाह आप स्वयं भी कर सकते हैं या किसी पंडित जी को बुलाकर भी तुलसी विवाह करवा सकते हैं।

Tulsi Vivaah Ki Vidhi

तुलसी के साथ शादी के लिए शालिग्राम जी यानी की विष्णु जी की काली मूर्ति चाहिए होती हैं। अगर यह नही मिले तो आप अपनी इच्छा के अनुसार सोने, पीतल या मिश्रित धातु के भी मूर्ति ले सकते हैं या आप विष्णु जी की तस्वीर भी ले सकते हैं अगर आप कुछ नही कर पा रहे हैं तो पंडित जी से बोलकर मंदिर से शालिग्राम जी की मूर्ति मंगा सकते हैं। तुलसी के गमले को गेरू और चुना से रंग कर सजाए। साथ मे साड़ी, फूल आदि से सुंदर मंडप सजाना चाहिए। आइये जानते हैं पूजा विधि के बारे में।

  • सबसे पहले गणेश जी का पूजन करें फिर मंत्रो के उच्चारण करते हुए बाजे के साथ भगवान विष्णु के प्रतिमा को तुलसी जी के निकट रखे।
  • इसके बाद विष्णु जी का आवाहन करें। आवाहन के लिए मंत्र इस प्रकार है ” आगच्छ भगवन देव अर्चयिष्यामि केशव। तुभ्यं दास्यामि तुलसी सर्वकाम्प्रदो भव”
  • तुलसी जी और भगवान विष्णु की प्रतिमा को प्राण प्रतिष्ठा करके स्तुति आदि के द्वारा भगवान को निंद्रा से जगाए।
  • विष्णु जी को पीले वस्त्र धारण करवाये , पीला रंग विष्णु जी को बहुत प्रिये हैं।
  • काँसे के पात्र में दही, घी, शहद रख कर भगवान को अर्पित करें।
  • तुलसी माता को लाल रंग की ओढनी ओढानी चाहिए शालिग्राम जी को चावल नही चढ़ाया जाता हैं उन्हें तिल चढ़ाए।
  • तुलसी माता की शादी के लिए साड़ी, मेंहदी, काजल, बिंदी, सिन्दूर आदि सुहाग का सामान अर्पित करें।
  • जो भी भोजन बना है वह भगवान को भोग लगाये और कन्यादान का संकल्प करें। विधि पूर्वक विवाह को सम्पन करे।

Tulsi Vivaah Ki Katha

जालंधर नाम का एक दानव था उसकी पत्नी वृंदा कठोर पतिव्रता धर्म का पालन करती थी। जलंधर की पत्नी की पतिव्रता शक्ति के कारण बड़े से बड़े देवता भी उसे परास्त नही कर पाए। वह अभिमान से ग्रस्त होकर अत्याचार करने लगा तब सभी देवतागण सुरक्षा के लिए विष्णु भगवान के पास गए। विष्णु भगवान ने छल से जालन्धर का वेश धारण करके वृंदा का सतीत्व भांग कर दिए जिसके कारण जलंधर मारा गया।

इस बात से क्रोधित हो कर वृंदा ने विष्णु भगवान को पत्थर बन जाने का श्राप दे दिया। तब विष्णु भगवान् ने कहा- हे वृन्दा तुम मुझे बहुत प्रिय हो। तुम्हारे सतीत्व के कारण तुम तुलसी बन कर मेरे साथ रहोगी। तुम्हारे बिना मैं कोई भोग स्वीकार नहीं करूँगा। जो मनुष्य तुम्हारा और मेरा विवाह करवाएगा वह परम धाम को प्राप्त होगा। और वृंदा सती हो गई उसकी रख पर एक पौधे बने जन्म लिया यही पौधा तुलसी हैं।

Tulsi Vivaah Ka Geet

मेरी प्यारी तुलसा जी बनेगी दुल्हनियां, सजके आयेगे दूल्हे राजा,  देखो देवता बजायेंगे बाजा —2

सोलह सिंगार मेरी तुलसा करेंगी, हल्दी चढ़ेगी माँग भरेगी। देखो होठों पे झूलेगी नथनियाँ ।।

देखो देवता — देवियां भी आई और देवता भी आये , साधु भी आये और सन्त भी आये , और आई है संग में बरातिया ।।

देखो देवता — गोरे -गोरे हाथों में मेहन्दी लगेगी, चूड़ी खनकेगी ,वरमाला सजेगी , प्रभु के गले में डालेंगी वरमाला ।।

देखो देवता — लाल -लाल चुनरी में तुलसी सजेगी , आगे-आगे प्रभु जी पीछे तुलसा चलेगी , देखो पैरो में बजेगी पायलियाँ ।।

देखो देवता — सज धज के मेरी तुलसा खड़ी है, डोली मंगवा दो बड़ी शुभ घड़ी है , देखो आँखों से बहेगी जलधारा ।।

देखो देवता —

Tulsi Mata Ki Aarti

जय जय तुलसी माता , सब जग की सुख दाता ।। जय ।।

सब योगों के ऊपर , सब लोगो के ऊपर । रुज से रक्षा करके भव त्राता ।। जय।।

बटु पुत्री हे श्यामा सुर बल्ली हे ग्राम्या । विष्णु प्रिये जो तुमको सेवे सो नर तर जाता ।। जय ।।

हरि के शीश विराजत त्रिभुवन से हो वंदित । पतित जनों की तारिणी तुम हो विख्याता ।। जय ।।

लेकर जन्म विजन में आई दिव्य भवन में । मानवलोक तुम्हीं से सुख सम्पत्ति पाता ।। जय ।।

हरि को तुम अति प्यारी श्याम वरुण कुमारी । प्रेम अजब है उनका तुमसे कैसा नाता ।। जय ।।

बोलो तुलसी माता की जय …. !!!

उम्मीद है कि Tulsi Vivaah से सम्बंधित यह जानकारी आपको पसंद आई होंगी। आप हमारे इस पोस्ट को अपने दोस्तो के साथ शेयर कर हमारा मनोबल बढ़ा सकते है ताकि हम इसी तरह नई नई जानकारियाँ हिंदी में आप सब के लिए लिख सकें। अगर आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो आप हमें नीचे Comment Box में बता सकते हैं

नमस्कार दोस्तों, मैं परिधि GangaGyan.in पर लेखक हूँ। मुझे नई - नई टेक्नोलॉजी से सम्बंधित जानकारियां सीखना और उसके बारे में दूसरों को बताना पसंद है. GangaGyan पर मैं हरदिन कुछ नई जानकारी लिखती हूँ, आप इसी तरह हमें सहयोग करते रहे ताकि हमारा मनोबल बना रहे | धन्यवाद

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here