SDM कैसे बने? SDM Full form क्या होता हैं पूरी जानकारी हिंदी में |

SDM कैसे बने? SDM Full form नमस्कार दोस्तों, गंगाज्ञान पर आप सबों का एक बार फिर से स्वागत है। दोस्तों, आज के इस पोस्ट में हम SDM और DM बनने की पूरी जानकारी के बारे में बताने वाले है। जैसा कि आज का युग में प्रतियोगियों की संख्या काफी बढ़ गयी है। आज के समय मे competition बहुत ज्यादा बढ़ गयी है। नौकरी कम और उम्मीदवार ज्यादा। जहाँ एक ओर सभी हाई पोस्ट पदों पर नियुक्ति के लिए सभी क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है वही दूसरी ओर सम्मान और अच्छी सैलरी भी देखने को मिलती है।

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इसलिए ऐसे में आज हर उम्मीदवार द्वारा बहुत ही पहले से उसको अपने लक्ष्य का निर्धारण करने पड़ता है और उसकी तैयारियों में जुट जाना पड़ता है इसके लिए बहुत ही कड़ी मेहनत और बहुत ज्यादा पढ़ाई करनी की आवश्यक्ता पड़ती है तब जाकर लोग कही अच्छे पदों पर अधिकारी बन पाते हैं कई बार तो अच्छी शिक्षा और जानकारी के अभाव में उम्मीदवार खाली हाथ लौट आते हैं और उनका ख्वाब ख्वाब ही रह जाता है कई लोग तो ऐसे होते है जो यह भी निर्णय नही लिये होते हैं कि आगे लाइफ में उन्हें क्या अच्छा करना है जिससे उनका जीवन आन्नदमय और अमीरी से बीते। बाद में उन्हें पछताना पड़ता है। इसलिए किसी भी क्षेत्र में सम्पूर्ण सफलता प्राप्त करने के लिए अपना लक्ष्य और लक्ष्य से जुड़ी सम्पूर्ण जानकारी और उसकी पढ़ाई लिखाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए ।अपने लक्ष्य के प्रति परिश्रम करते रहना चाहिए ,चुकी अलग अलग इंसान की इच्छा अलग अलग क्षेत्रों में अपना कैरियर बनाने की होती है। कोई इंजीनियरिंग क्षेत्र में जाना चाहता है तो कोई मेडिकल के क्षेत्र में तो कोई प्रशासनिक अधिकारी के रूप में देश की सेवा करना चाहता है। लेकिन सभी क्षेत्रों में नौकरी पाने के लिए जी तोड़ परिश्रम करना पड़ता है।

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हम आज के इस पोस्ट में ऐसे ही एक सामाजिक और प्रशासनिक सेवा पद SDM ऑफिसर के बारे में सम्पूर्ण जानकारियां लिखने जा रहे हैं । SDM किसे कहते है? SDM का फुल्लफॉर्म क्या होता है? SDM कैसे बनते है? SDM के बाद DM कैसे बन सकते है? उनकी सैलरी और कार्य इत्यादि के बारे में । इस प्रकार SDM बनने से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी यदि आप जानना चाहते है और SDM बनने का ख्वाब रखते है तो हमारा यह पोस्ट बिल्कुल आपके लिए है। आज के इस पोस्ट में हम आपको SDM अधिकारी कैसे बने की पूरी जानकारी हिंदी में बताने जा रहे हैं तो चलिए शुरू करते है-

SDM Full Form 

SDM का फुल्लफॉर्म “SUB-DIVISONAL MAGISTRATE “होता है। इसे हिंदी में “उप – प्रभागीय न्यायाधीश (अनुमंडलीय न्यायाधीश)” कहा जाता है।

SDM किसे कहते है? SDM कौन होता है?

SDM एक उपाधि है जिसे SUB- DIVISONAL MAGISTRATE (अनुमंडलीय/ उप-प्रभागीय न्यायाधीश ) कहा जाता है। यह उपाधि उस व्यक्ति को दिया जाता हैजो एक जिला के किसी भी अनुमंडल (उपखंड) का प्रमुख न्यायायिक अधिकारी होता है। अर्थात SDM जिले के नीचे के स्तर का एक प्रशासनिक अधिकारी होता है। SDM अपने जिले का पूरा नेतृत्व करने वाले सबसे उच्च पद जिला अधिकारी DM (District Magistrate/ collector) के बाद का स्थान रखता है। DM भी एक भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी होता है। SDM के पद पर लगभग 10 वर्ष कार्य करने के बाद DM के पद पर पहुचता है और अपने नीचे वाले SDM के साथ साथ सभी sub divisons (अनुमंडलों) का नेतृत्व करता है।

जैसा कि हर राज्य के जिले को कई अनुमंडल में बंटा जाता है। तो प्रत्येक अनुमंडल का नेतृत्व करने वाला अधिकारी SDM होता है। अपने उपखंडों के अंदर कार्यरत सभी तहसीलदारों का नेतृत्व करने वाला अधिकारी SDM ही होता है। साथ ही एक SDM जिला अधिकारी और उसके उपखंडों के तहसीलदारों के बीच समन्वय स्थापित करने का कार्य करता है।

SDM बनने की शैक्षणिक योग्यता क्या होनी चाहिए?

SDM ( उप प्रभागीय न्यायाधीश ) बनने के लिए किसी भी उम्मीदवार को किसी भी मान्यता प्राप्त विश्व विद्यालय से स्नातक उतीर्ण करना होगा। चाहे वो किसी भी सब्जेक्ट्स (साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स ) से हो। अगर कोई उम्मीदवार अपने ग्रेजुएशन के दौरान फाइनल ईयर में है या फिर रिजल्ट निकलने इंतजार कर रहा है तो वह भी इस पद के लिए अप्लाई कर सकता है। साथ ही कंप्यूटर नॉलेज भी अच्छी होनी चाहिए।

SDM बनने के लिए आयुसीमा क्या होनी चाहिए? 

SDM अर्थात उप-प्रभागीय न्यायाधीश बनने के लिए सामान्य वर्ग के किसी भी उम्मीदवार की न्यूनतम आयुसीमा 21 वर्ष और अधिकम आयुसीमा 40 वर्ष होनी चाहिए। SC/ ST और OBC ( अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग) के उम्मीदवार की आयुसीमा में कुछ वर्ष की छूट दी गयी है। जो 21 वर्ष से 45 वर्ष तक होनी चाहिए। साथ ही PWD के उम्मीदवार की आयुसीमा 55 वर्ष तक होनी चाहिए।

SDM कैसे बने? SDM बनने के लिए कौन सी परीक्षा होती हैं?

चूँकि SDM हाई रैंक का प्रशासनिक पद होता है। रैंक अच्छे आने पर ही IAS के अधीन SDM की उपाधि दी जाती है नही तो उम्मीदवार ग्रुप A या ग्रुप B के अधिकारी , तहसीलदार इत्यादि बन सकता है। SDM बनने के लिए दो विकल्प उपलव्ध कराये जाते है।

1. संघ लोक सेवा आयोग – सिविल सर्विस परीक्षा पास करने के बाद IAS (इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस) के अधीन SDM बन सकते हैं।

2. स्टेट पब्लिक सर्विस कमिशन- प्रोविज़नल सिविल सर्विस परीक्षा पास करने के बाद SDM बन सकते हैं।

UPSC CSE परीक्षा या SPSC PCS परीक्षा में से किसी भी परीक्षा का चयन करके उम्मीदवार इस पद पर नियुक्ति पा सकता है।इसके लिए उम्मीदवार को इन परीक्षाओं की तैयारी बहुत ही परिश्रम और लगन के साथ करनी होगी। इसके सिलबुस की पूरी पढ़ाई और जानकारी प्राप्त करनी होगी। दोनों ही परिस्थियों में उम्मीदवार को इसके लिए इन परीक्षाओं की Vacancy निकलने पर परीक्षा में शामिल होने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना होगा, एडमिड कार्ड भी डाउनलोड करना होगा और एंट्रेंस परीक्षा देकर ही UPSC या SPSC के किसी भी एग्जामिनेशन में शामिल हो सकते है। उम्मीदवार यह सब इनके ऑफिसियल वेबसाइट के माध्यम से कर सकते हैं। आगे हम SDM बनने के लिए इन परीक्षाओं के बारे में बताने जा रहे हैं ये परीक्षाएं दोनों ही स्थितियों में एक ही जैसे लिए जाते हैं जो तीन चरणों मे पूरा किया जाता है।

SDM बनने के लिए परीक्षा विधी

जैसा कि हमने कहा कि ये परीक्षाएं तीन चरणों मे संपन्न किया जाता है। वे इस प्रकार हैं-

1. Preliminary Exam (प्रारम्भिक परीक्षा)

2. Main Exam (मुख्य परीक्षा)

3. Personal Test / Interview ( साक्षात्कार ).

प्रारम्भिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा लिखित परीक्षाएं होती हैं। जबकि पर्सनल टेस्ट (साक्षात्कार) मौखिक (Mock) परीक्षा होती है।

1. Preliminary Exam (प्रारम्भिक परीक्षा) :- प्रीलिमिनरी एग्जाम लिखित परीक्षा होती है। यह परीक्षा लगभग जून माह में आयोजित किया जाता है। इस परीक्षा में दो प्रश्नपत्र होते हैं।

प्रश्न पत्र 1 – General Ability Test 1 ( जनरल स्टडीज 1) और

प्रश्नपत्र 2 – Civil Sercices Aptitute Test ll (जनरल स्टडीज ll)

दोनो ही परीक्षाएं वैकल्पिक रूप से लिये जाते है। इसमें प्रश्नों के उत्तर को चार obtion में एक सही उत्तर चुनना होता है। प्रश्नपत्र 1 में कुल 200 अंकों के 100 प्रश्न पूछे जाते हैं। प्रश्नपत्र 2 में कुल 200 अंको के 80 प्रश्न पूछे जाते है। इस प्रकार प्रीलिमिनरी एग्जाम में कुल 400 अंको के 180 प्रश्न पूछे जाते है। जिसमें 33% अंक आने पर ही उम्मीदवार को क्वालीफाई किया जाता है। इसमें नेगेटिव मार्किंग भी रहता है। इसे हिंदी या इंग्लिश किसी भी भाषा मे दे सकते है। इसमें 10th / 12th क्लासेस के स्तर का Questions पूछा जाता है। यह परीक्षा सिर्फ क्वालीफाइंग परीक्षा होता है। इसके अंक फाइनल मेरिट लिस्ट में नही जोड़े जाते है। इसे क्वालीफाई करने वाले उम्मीदवार को ही दूसरे चरण मुख्य परीक्षा के लिए बुलाया जाता है।

2. Main Exam (मुख्य परीक्षा) :- उप प्रभागीय न्यायाधीश बनने के लिए उम्मीदवार को प्रीलिमिनरी परीक्षा क्वालीफाई करने के बाद मुख्य परीक्षा में शामिल होना होता है। मुख्य परीक्षा का आयोजन लगभग अक्टूबर माह में किया जाता है। मुख्य परीक्षा में 8 पेपर अनिवार्य होते हैं। सभी पेपर मेरिट रैंकिंग प्रवृति के होते हैं प्रत्येक पेपर में अंको के लिए 25% अंक स्कोर करना अनिवार्य होता है। मुख्य परीक्षा के पेपर descriptive answer type (वर्णात्मक उतर प्रकार) के होते हैं। मुख्य परीक्षा के पेपर इस प्रकार है-

  1. पेपर 1- हिंदी, 150 अंक
  2. पेपर 2- निबंध, 150 अंक
  3. पेपर 3- जनरल स्टडीज I, 200 अंक
  4. पेपर 4 – जनरल स्टडीज II, 200 अंक
  5. पेपर 5 – जनरल स्टडीज III, 200 अंक
  6. पेपर 6 – जनरल स्टडीज IV, 200 अंक
  7. पेपर 7 – वैकल्पिक प्रश्नपत्र I, 200 अंक
  8. पेपर 8 – वैकल्पिक प्रश्नपत्र II, 200 अंक

3. Interview/ Personal Test (साक्षात्कार):-

साक्षात्कार परीक्षा का अंतिम चरण है। जो mock परीक्षा होता है। इसका आयोजन लगभग फरवरी से अप्रैल माह के बीच किया जाता है । जो उम्मीदवार Main Exam (मुख्य परीक्षा) को क्वालीफाई करते है उन्हें ही साक्षात्कार के लिए बुलाया जाता है। यह 200 अंको का होता है। इसे हिंदी या अंग्रेजी किसी भी भाषा मे दिया जा सकता है।इसमें अर्जित किये गए अंक और Main Exam में अर्जित किये गए अंको के आधार पर ही मेरिट रैंक का निर्धारण किया जाता है। अच्छे हाई रैंक आने पर ही उम्मीदवार को IAS के अधीन SDM अधिकारी बनाया जाता है। इस परीक्षा का उद्देश्य उम्मीदवारों के शैक्षिक कौशल और उनकी क्षमता का, उनके ज्ञान का आकलन करना है। उम्मीदवारों को उनकी जानकारी और स्मृति तथा समझ की गहराई का विश्लेषण करना ही इस परीक्षा का मुख्य उद्देश्य होता है। इस परीक्षा में साक्षात्कार लेने वाले पैनल के सामने उम्मीदवार को यह साबित करना होता है कि वे SDM इत्यादि पद के लिए बिल्कुल परफेक्ट हैं।

SDM की मासिक सैलरी और मिलने वाली सुविधाएं

SDM बन जाने के बाद शुरुआती दौर में ग्रेड पे के अनुसार न्यूनतम मासिक वेतन 50,100 रु से लेकर अधिकतम वेतन 67,700 रु तक होती है। जो बाद में धीरे धीरे बढ़ कर 1 लाख से डेढ़ लाख रु प्रति माह तक हो सकती है। साथ ही SDM को सरकार के द्वारा बहुत सारी फैसिलिटीज उपलव्ध कराई जाती है जैसे:-

  1. बिना किसी कीमत या बहुत ही कह कीमत पर रहने के लिए घर तथा घर के कामकाज के लिए नौकर और घर की रखवाली के लिए एक gateman की सुविधा उपलव्ध कराई जाती है।
  2. गवर्नमेंट कार्य हेतु यात्रा के दौरान ठहरने के लिए उच्च श्रेणी के आवास की सुविधा दी जाती है।
  3. SDM को आवागमन के लिए सरकारी गाड़ी और उसके साथ एक पर्सनल ड्राइवर भी उपलव्ध कराई जाती है।
  4. एक SDM को नौकरी खत्म होने के बाद रिटायरमेंट पेंशन भी मिलता है।

SDM के कार्य क्या क्या होते हैं?

एक SDM के कार्य बहुत ही सराहनीय होता है। एक SDM के निम्नलिखित महत्वपूर्ण कार्य होते है-

  1. एक SDM अपने क्षेत्र के सभी प्रकार के जमीन व्यापार का लेखाजोखा कार्य करता है। इसके अलावा भी कई उपखंड जो एक SDM के अधीन रहता है उनके सारे भूमिगत कार्यों का नेतृत्व भी एक SDM ही करता है।
  2. अपने क्षेत्र के सभी कार्य जैसे :- वाहनों का पंजीकरण, ड्राइवेरिंग लाइसेंस बनवाने तथा उनका नवीनीकरण करना, विवाह पंजीकरण, बाल पंजीकरण इत्यादि कार्य SDM करता है।
  3. चुनाव का कार्य, राजस्व समारोह, राजस्व कामकाज, हथियार लाइसेंस बनवाने, ST/SC, OBC और डोमिसाइल जैसे प्रमाणपत्र बनवाना तथा उनका नवीनीकरण करना इत्यादि कार्य SDM के अधीन होता है।
  4. Arm लाइसेंस बनाना और इनका नवीनीकरण करना इत्यादि कार्य SDM करता है।
  5. अपने उपखंडों की व्यक्तियों की देखरेख करना जैसे महामारी, प्राकृतिक आपदा- बाढ़, सूखा, भूकंप, भूस्खलन, ब्रजपात इत्यादि से पीड़ित लोगों को और विद्युत प्रभावित लोगों इत्यादि को अनेको प्रकार से सहायता उपलव्ध करवाना इत्यादि कार्य एक SDM करता है।
  6. एक SDM अपने सभी क्षेत्रों के सभी तहसीलदारों और कर्मचारियों पर नियंत्रण रखने के साथ साथ तहसीलदारों और अपने जिले के जिला अधिकारी के बीच पत्राचार के रूप में समन्वय स्थापित करता है।
  7. एक SDM का मुख्य कार्य आपराधिक प्रक्रिया संहिता 1973 और कई अन्य नाबालिग तथ्यों के अंतर्गत विभिन्न मजिस्ट्रेट कार्यभाल संभालता है। SDM अपने पूरे उपखंडों का नेतृत्व करता है

तो उम्मीद है कि हमारा यह पोस्ट SDM कैसे बने? SDM Full form की जानकारी आपको बेहद पसंद आई होगी। आप हमारे इस पोस्ट को आपने दोस्तों के साथ शेयर कर हमारा मनोबल बढ़ा सकते हैं ताकि हम इसी तरह नई नई जानकारियाँ आप सब के लिए हिन्दी में लिख सके। अगर आपका कोई सवाल या सुझाव है तो आप हमारे कमेंट बॉक्स में बता सकते हैं।

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