रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है – इसके पीछे क्या महत्वा है – सुभ मुहर्त 2020

रक्षा बंधन क्यों मनाया जाता है - इसके पीछे क्या महत्वा है - सुभ मुहर्त

नमस्कार दोस्तो, गंगाज्ञान पर आप सबों का स्वागत है। आज के इस लेख में हम रक्षाबंधन की संपूर्ण जानकारी प्रदान करने वाले है। जैसा कि हम सब जानते है कि Raksha Bandhan 2020 भाई बहनों के बीच मनाया जाता है। रक्षाबंधन का त्योहार आते ही भाई बहनों के चेहरे पर खुशियां झलकने लगती है। चूंकि भाई बहन का रिश्ता ही इतना पवित्र और अनमोल होता है कि इसे हम शब्दों में बयां नही कर सकते। इसका सम्मान पूरी दुनिया मे सच्चे मन से किया जाता है। भाई की कलाई पर बहनो के द्वारा प्यार भरा राखी बांधने का बहुत ही खास महत्व होता है। चूंकि रक्षाबन्धन भाइयों की लंबी उम्र और सलामती के लिए मनाया जाना वाला त्योहार है।

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आज के वर्तमान युग मे शायद ही कोई ऐसा होगा जो यह नही जानता होगा कि रक्षाबन्धन का क्या अर्थ होता है? रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है? रक्षाबंधन का क्या महत्व होता है? लेकिन रक्षाबंधन मनाने के पीछे बहुत सारी कड़ी ऐसे है जिनके बारे में लोग नही जानते है या भूल चूंके हैं।

क्योंकि रक्षाबंधन पौराणिक काल से ही मनाया जा रहा है। आज के इस लेख में हम रक्षाबंधन से जुड़े हर पहलुओं के बारे में जानकारी प्रदान करने वाले हैं। रक्षाबन्धन कब और क्यों मनाया जाता है, कैसे मनाया जाता है। इसकी प्राचीन मान्यता क्या है, पौराणिक कथा का क्या महत्व है? रक्षाबंधन का क्या इतिहास है, क्या रक्षाबंधन पूरी दुनिया मे मनाया जाता है,क्या सभी धर्मो में रक्षाबंधन मनाया जाता है , रक्षाबन्धन के अलावा और कितने ऐसे त्योहार हैं जो भाई बहनों के प्यार का प्रतीक माना जाता है इत्यादि रक्षाबन्धन से जुड़े सभी तथ्यों की जानकारी यदि आप जानना चाहते है तो हमारा यह लेख अवश्य ही पूरा पढ़िए और यदि पसंद आये तो अपने दोस्तों, भाई बहनों के साथ जरूर शेयर करे।

रक्षा बंधन का शाब्दिक अर्थ क्या है?

चूंकि हमारा देश भारत संस्कृतियों की भूमि है और भारतीय संस्कृत भाषा के अनुसार रक्षाबन्धन दो शब्दों के मिलने से बना एक शब्द है। जिसमे रक्षा और बंधन दो अलग-अलग शब्द है यहां पर रक्षा का अर्थ होता है “रक्षा प्रदान करना “और बंधन का अर्थ होता है “एक डोर या एक गांठ में बंधना/बांधना”। इस प्रकार रक्षाबंधन त्योहार का शाब्दिक अर्थ प्यार रूपी एक पवित्र गांठ में बंधकर एक रक्षा प्रदान करना है।

अर्थात यह बंधन रूपी धागा भाई और बहन के बीच अटूट रिश्ते को बयां करता है। जिसमे बहन अपने भाई के कलाई पर अपने स्नेह का राखी इसलिए बांधती है ताकि मेरे भैया सही सलामत रहे और दीर्धायु हो जिससे उम्र भर वो मेरी हर तरह से रक्षा करते रहें। ऐसा करने के पीछे बहुत बड़ा राज छिपा हुआ है जो हम आपको आगे बताएंगे।

रक्षाबन्धन त्योहार किसे कहते है?

बहनो द्वारा भाइयो की कलाई पर राखी बांधने की पवित्र पर्व को रक्षाबन्धन त्योहार कहा जाता है। रक्षाबन्धन खासकर भारत देश मे मनाया जाने वाला हिन्दुओ का बहुत बड़ा पवित्र और प्रसिद्ध त्योहार है। रक्षाबन्धन पूरे भारतवर्ष में हिदू, सिख और ईसाई धर्मों में अलग अलग रूप में बड़े ही हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया जाता है। भारत के साथ साथ अन्य देशों में जैसे नेपाल, चीन में भी रक्षाबन्धन बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।

रक्षा बंधन का मलतब रक्षा करने का धागा माना जाता है। इसका मतलब भाईबहन के रक्षा का प्रतीक माना जाता है। साथ ही रक्षाबन्धन भाई बहन के बीच प्यार, अटूट विस्वास और शांति व्यक्त करने के लिए मनाया जाता है। रक्षाबन्धन इसे राखी/ राखिड़ी/राखरी भी कहा जाता है यह त्योहार भाई बहन के रिश्ते और बंधन को एक पतली सी धागे से ही इतनी मजबूत बनाती है कि इसे कोई खंडित नही कर पाता है। क्योंकि रक्षाबन्धन भाई बहन के बीच कर्तव्य का प्रतीक माना जाता है।

रक्षाबन्धन कब मनाया जाता है?

रक्षाबन्धन हिन्दू कलेंडर के अनुसार हर वर्ष श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की अंतिम तारीख यानी कि श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है। जो ज्यादातर अगस्त के महीने में पड़ता है। रक्षाबन्धन अत्यंत ही शुभ मुहूर्त में मनाया जाता है। अशुभ घड़ी में मनाया गया रक्षाबन्धन दुष्प्रभावी होता है। इसलिए इसे शुभ मुहूर्त में ही मनाने का खास प्रावधान है। इसे भाई बहन के बीच जश्न मनाने का त्योहार भी माना जाता है।

श्रावण पूर्णिमा के दिन ही भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण कर राजा बलि के घमण्ड को चकनाचूर किये थे, इसलिए यह त्योहार को बलेव नाम से भी मनाया जाता है, महाराष्ट्र में इसे श्रावणी पूर्णिमा या श्रावणी के नाम से मनाया जाता है। भारत के भिन्न-भिन्न राज्यो के नीचे हम कुछ वर्षों के अंतराल मनाये जाने वाले रक्षाबन्धन के लिस्ट बता रहे है-

रक्षाबन्धन 2020 शुभ मुहूर्त

वर्ष 2020 में रक्षाबंधन 3 अगस्त को है। रक्षा बंधन का शुभ मुहूर्त सुबह 9:28 मिनट से लेकर 21:14 मिनट तक है। यानि राखी बांधने का शुभ समय 12 घण्टे का ही है। जो श्रावण मास के पूर्णिमा को मनाया जाएगा।

रक्षाबन्धन 3 अगस्त 2020 शुभ मुहूर्त

रक्षाबन्धन 2020 शुभ मुहूर्त। 09:28AM से 09:17 PM

रक्षाबन्धन 2020 समयावधि। 11 घंटा 49 मिनट

अपराह्न समय। 01:47 PM से 04:29PM

अपराह्न समयावधि 2 घण्टे 42मिनट

प्रदोष काल। । 20:08 से 22:18

प्रदोष समयावधि। 02 घण्टे 8 मिनट

रक्षाबन्धन समाप्ति। 9:28 PM तक।

रक्षाबन्धन लिस्ट वर्ष 2020 से वर्ष 2031 तक

वर्ष तिथि दिन
2020 3 अगस्त सोमवार
2021 22 अगस्त रविवार
2022 11 अगस्त गुरुवार
2023 30 अगस्त बुधवार
2024 19 अगस्त सोमवार
2025 09 अगस्त शनिवार
2026 28 अगस्त शुक्रवार
2027 17 अगस्त मंगलवार
2028 05 अगस्त शनिवार
2029 23 अगस्त गुरुवार
2030 13 अगस्त मंगलवार
2031 02 अगस्त शनिवार

रक्षाबन्धन कैसे मनाया जाता है?

राखी का त्योहार हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन को बड़ा ही शुभ दिन मन जाता है। इस दिन बहने अपने भाइयों की सुख समृद्धि के लिए उनके कलाई पर रंग बिरंगी राखी बांधती है और भाई बहन को उसकी रक्षा का वचन देते हैं। भारत मे अलग-अलग जगहों पर रक्षाबन्धन लोक परंपरा के अनुसार अलग-अलग रूप में मनाया जाता है। भारत के अधिकतर राज्यो में यह त्योहार एक जैसे ही मनाया जाता है। रक्षाबन्धन से एक दिन पहले ही सारी ख़रीदारी जैसे मिठाई, राखी इत्यादि कर ली जाती है। इस दिन बहन सुबह में स्नान इत्यादि करके राखी चंदन, कुमकुम, चावल, दीपक, मिठाई इत्यादि लेकर तैयार रहती है और राखी बांधते के बाद ही अन्न जल ग्रहण करती है।

सभी बहने अपने भाई के माथे पर तिलक और चावल लगाती है, फिर दीपक से आरती करती है उसके बाद भाई के दाहिने कलाई पर मंत्र उच्चारण करते हुए राखी बांधती है और भाई को मिठाई खिलाती है फिर पानी पिलाती है। इस प्रकार बहन अपना प्यार व्यक्त करते हुए ईश्वर से अपने भाई की सलामती और दीर्घायु के लिए प्राथना करती है। बदले में भाई बहन की रक्षा और मदद करने के लिए बचन देते है साथ मे मिठाई, उपहार, कपड़े और पैसे इत्यादि भी सप्रेम बहन को भेंट करते हैं।

राखी बनते समय इन मन्त्रों को बोलै जाता है

येन बध्दो बलि: राजा दानवेन्द्रो महाबलः ।

तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।

Raksha Bandhan का महत्व

रक्षाबन्धन त्योहार में भाई बहन के प्यार को बड़े ही हर्षोल्लास से एक tradition के रूप में मनाया जाता है। भारत की इस विशाल पर्व की महत्ता उल्लेखनीय है। रक्षाबन्धन भाई बहन का प्रतीक है जो सिर्फ खून के रिश्ते को ही उजागर नही करता है बल्कि ये एक पवित्र रिश्ते का एहसास कराता है यह त्योहार खुशी प्रफह करता है साथ ही भाइयो को यह एहसास दिलाता है कि उन्हें अपने बहनो की हमेशा रक्षा करनी है। इसका सबसे बड़ा महत्व यह है कि इस पर्व को सिर्फ सगे भाई बहन ही नही मानते है बल्कि कोई भी स्त्री या पुरुष जो कि एक दूसरे को भाई बहन मानते है और भाई बहन तथा इस पर्व की मर्यादा को समझते है वो इसका पालन कर सकते हैं।

यूं कहें तो रक्षाबन्धन एक परम्परा ही नही नही बल्कि बड़ा ही पवित्र बंधन है जो एक धागे के रूप में संस्कारों को बांधती है। श्रावण माह बाद ही मनमोहक होता है यह महीना मछुआरे, किसानों और समुद्री यात्रा करने वाले व्यवसाओं के लिए बड़ा महत्व रखता है।

रक्षाबन्धन हर वर्ष क्यों मनाया जाता है?

रक्षाबन्धन हर वर्ष भाई बहन के बीच प्यार जगाने के लिए मनाया जाता है। Raksha Bandhan बहन की रक्षा के अपने बचन को निभाने के लिए याद दिलाता है। रक्षाबन्धन का त्योहार सदियों से चला आ रहा है। जो हर वर्ष मनाया जाता है। प्राचीन काल से चले आ रहे इस त्योहार को आज भी उसी तरीके और परंपरा से मनाया जाता है। प्राचीन समय मे भाई बहन को सोना, चांदी, हीरे यहां तक कि सम्पूर्ण साम्रज्य ही उपहार स्वरूप भेंट करते थे।

आज भी परंपरा बरकरार है। चूंकि आज लोगों की जीवन शैली बदल रही है इसलिए कुछ क्षेत्रों में त्योहार मनाने की परंपरा भी बदल रही है। आज यह त्योहार बड़ी ही धूमधाम से व्यापक रूप से और नए तौर रतिको से मनाया जाता है। रक्षाबन्धन मनाने के पीछे दैविक घटनाये और कई प्राचीन कथाये उभरकर सामने आई है। रक्षाबन्धन की शुरुआत कैसे हुई, क्यों मनाया जाता है इसके पीछे दैविक कथाये और प्राचीन ऐतिहासिक कहानियाहै जिससे हम आपको अवगत कराने वाले है।

1. इंद्रदेव की कथा – Raksha Bandhan

भविष्य पुराण के अनुसार जब असुरो के राजा बलि ने देवताओं से लगभग 12 वर्षों तक अनवरत युध्द करता रहा तब देवताओं के राजा इंद्रा को काफी हानि हुई थी। वे असुरो से पराजित होकर अपने सभी देवगणों के साथ अमरावती चले गए। उधर असुरो ने तीनों लोकों पर अपना आधिपत्य जमा लिया और यह घोषणा करवा दिया कि इस राज्य में यज्ञ, वेदों का पठन पाठन, पूजा और किसी प्रकार का धार्मिक अनुष्ठान नही होंगे। इस तरह तीनो लोको में धर्म का नाश होने लगा।

ऐसी स्थिति से उबरने के लिए देवराज इंद्र गुरु बृहस्पति देव और उनकी पत्नी शुचि के पास गए और अपनी व्यथा कहि। तब शुचि ने देवराज इंद्र से कहा कि कल ब्राह्मण शुक्ल पूर्णिमा है मैं आपको विधानपूर्वक सिद्ध किया गया रक्षासूत्र देती हूं उसे कल ब्राह्मणों द्वारा रक्षाविधान करवाकर अपनी कलाई पर बंधवा लेना अवश्य ही आपकी विजय होगी। उन्होंने ऐसा ही किया इससे देवताओं का आत्मविश्वास बढ़ा और दानवों पर विजय प्राप्त किये इस तरह इंद्र के हाथों राजा बलि की पराजय हुई थी। उसी समय से Rakhi बांधने की प्रथा का प्रचलन शुरू हो गया।

उसी समय से युद्ध मे जाने से पहले सभी राजा और सैनिको को उनकी पत्नी या बहन हाथों में रक्षा सूत्र बांधने लगीं। जिससे वे सकुशल जीत हासिल कर सकें। दूसरी मान्यता के अनुसार ऋषियों की उपदेश की पूर्णाहुति इसी दिन होती थी। वे राजाओ के हाथों में रक्षासूत्र बांधते थें इसलिए आज भी ब्राह्मण अपने यजमानो को इस दिन रक्षासूत्र बांधते हैं।

2. मां संतोषी की कथा – Raksha Bandhan

भगवान गणेश के दोनों पुत्र शुभ और लाभ इस बात के लिए हट करने लगे कि उनकी कोई बहन नही है उन्हें बहन चाहिए।  इसलिए दोनों ने भगवान गणेश से एक बहन के लिए जिद्द करने लगे। इस पर नारद जी के हस्तक्षेप करने पर बाध्य होकर भगवान गणेश को अपनी शक्ति का प्रयोग करके मां संतोषी को प्रकट करना पड़ा। वही वह दिन श्रावण पूर्णिमा का दिन था। दोनों भाई, बहन को पाकर खुश हुए और मां संतोषी ने अपने भाइयों की रक्षा के लिए राखी बांध दी।

3. भगवान श्री कृष्ण और द्रोपदी की कथा – Raksha Bandhan

यह कथा महाभारत काल से जुड़ी हुई है। जब राजा युधिष्ठिर ने अपनी राजधानी इंद्रप्रस्थ में राजसूय यज्ञ का आयोजन किया उस यज्ञ में शिशुपाल भी आया हुआ था लेकिन जब शिशुपाल ने यज्ञ के दौरान भगवान कृष्ण का अपमान किया तब श्री कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध कर दिया। जिससे श्री कृष्ण की उंगली थोड़ी सी कट गई और रक्त बह गया तभी द्रोपदी ने अपने साड़ी का पल्लू फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दी। तब श्री कृष्ण ने द्रोपदी को वचन दिया कि वे इस वस्त्र के एक-एक धागे का ऋण चुकाएंगे।

कुछ समय बाद जब द्यूत क्रीड़ा में पांडव सबकुछ हर गए यह तक कि द्रोपदी को भी दांव पर लगा कर हर गए। तब कौरवों ने क्रीड़ा में जीती गई द्रोपदी का चीरहरण करने लगे तब श्री कृष्ण ने द्रौपदी के वस्त्र को बढ़ाते हुए द्रोपदी की लाज बचाई। और उसकी रक्षा की। इसलिए रक्षाबन्धन के दिन सभी बहन अपने भाइयों की सलामती के लिए उनके कलाई पर राखी बांधती हैं और भाई भी बहन की रक्षा करने का वचन देते हैं। उधर। महाभारत युद्ध के समय भगवान श्री कृष्ण ने रक्षासूत्र के बारे में बताने हुए युधिष्ठिर से कहा था कि रक्षाबन्धन का त्योहार अपने पांडव सेना के साथ मनाओ रक्षासूत्र में अदभुत शक्ति होती है इससे पांडव सेना की विजय होगी।

4. राजा बलि और माता लक्ष्मी की कथा ( वामन अवतार )

Raksha Bandhan से जुड़ी यह कथा भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और राजा बलि की कथा है। पौराणिक कथा के अनुसार असुरो के राजा बलि 100 यज्ञ पूरा करके अजेय प्राप्त कर लिया और धरती पर अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया उसके बाद वह स्वर्ग का सिंहासन प्राप्त करने की तैयारी करने लगा जब यह बात देवराज इंद्र को पता चला तो वे अपनी सिंहासन बचाने के लिए भगवान विष्णु के पास गए।

तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार में राजा बलि के दरबार मे पहुचें और भिक्षा की याचना की , वामन अवतार रूपी भगवान विष्णु को राजा बलि ने वचन दिया कि वे जो मांगेंगे उन्हें दिया जाएगा। तब भगवान विष्णु ने तीन पग भूमि मागीं। राजा इसे स्वीकार कर लिया और कहा कि तीन पग भूमि नाप लेंवे। तब भगवान् ने पहले पग में धरती को नापा दूसरे पग में पूरे स्वर्ग को। तब तक राजा सबकुछ समझ गए कि भगवान नारायण ही हैं। वे मुस्कुराते हुए तीसरा पग अपने शीस पर रखने के लि निवेदन किये भगवान विष्णु ने ऐसा ही किया।

इस तरह बलि अपना सबकुछ हारकर पाताल लोक में रहने को विवश हो गए। पाताल जाने से पहले राजा बलि के आग्रह पर वामन अवतार रूपी भगवान विष्णु अपने असली रूप में सामने आए। वे राजा बलि की दानवीरता देखकर बहुत प्रसन्न हुए और वर मांगने को कहें तब बलि ने कहा भगवान मैं तो सबकुछ गवां कर पाताल लोक जा रहा हूँ मेरी बस यही इच्छा है कि आप हर समय मेरे साथ रहें। भगवान विष्णु ने कहा तथास्तु और वे राजा बलि के साथ पाताल लोक चले गए।

उधर जब माता लक्ष्मी जी बैकुंठ में भगवान विष्णु का इंतजार कर रही थी माता लक्ष्मी जी को जब यह पता चला कि राजा बलि विष्णु भगवान को पाताल लोक लेकर चले गए तो वे चिंतित हो गईं उन्होंने नारद जी को बुलाकर मंत्रणा की और इस समस्या का निदान पूछा। तब नारद जी ने कहा कि आप राजा बलि को राखी बांधकर उन्हें अपना भाई बना ने और जब वे उपहार मांगने को कहे तो आप भगवान विष्णु को उपहार स्वरूप मांग लीजिये।

तब देवी लक्ष्मी एक गरीब महिला का वेश बदलकर पाताल लोक गई और नारद के कहे अनुसार राजा बलि को रक्षासूत्र बांधकर भी लिया तभी राजा बलि बोल पड़े कि इसके बदले मेरे पास आपको देने के लिए कुछ भी नही है तभी माता लक्ष्मी अपने साक्षात रूप में आई और बोली आपके पास तो साक्षात भगवान विष्णु जी है आप मुझे उन्हें ही दे दीजिए तब राजा बलि ने भगवान विष्णु को माता लक्ष्मी के साथ जाने दिया लेकिन जाते-जाते भगवान विष्णु ने कहा कि मैं हर वर्ष हर माह पाताल लोक में निवास करूँगा। वे चार माह चतुर्दर्शी कहलाते हैं और देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर देवउठनी एकादशी तक चलते हैं। इधर जिस दिन माता लक्ष्मी ने राजा बलि को रक्षासूत्र बांध था वह दिन श्रावण माह के पूर्णिमा का दिन था तब से वह दिन रक्षाबन्धन के रूप में मनाया जाता है। इसे बलेव के नाम से भी जाना जाता है।

5. यम और यमुना की कहानी

पौराणिक लोक कथा के अनुसार जब 12 वर्षो तक मृत्यु के देवता अपनी बहन यमुना के पास नही गए तब यमुना को काफी दुख हुआ बाद में गंगा मैया के परामर्श पर यम जी ने यमुना के पास जाने की इच्छा रखी तब यमुना जी भाई के आने से बहुत ख़ुशी हुई उन्होंने यम जी का बहुत ख्याल रखा। इस पर प्रसन्न होकर यम ने कहा कि यमुना तुम्हे क्या चाहिए तब यमुना ने कहा कि आप हर वर्ष मुझसे मिलने आना यम जी उसकी इच्छा पूरी कर दी। जिससे यमुना हमेशा के लिए अमर हो गई।

6. रानी कर्णावती और सम्राट हुमायु की कहानी

आधुनिक समय में गुजरात के चित्तोड़ की राजपूत राजा सांगा की विधवा रानी कर्णावती की कहानी काफी प्रचलित है उन्होंने अपने राज्य की रक्षा के लिए मुगल शासक हुमायूं को Rakhi भेजकर अपने राज्य की रक्षा करने के लिए संदेश भेजवाई सम्राट हुमायूं ने इसकी लाज रखी और उन्हें बहन मानकर उनके राज्य की रक्षा की।

अलग अलग धर्मो में रक्षाबंधन कैसे मानते हैं?

रक्षाबन्धन का पर्व हमारे भारतीय संस्कृति का एक ऐसा रत्न है जिसके रेशमी धागो में बंधी राखी के रूप में सुंदर रिस्ते झिलमिलाते हैं। हमारे देश भारत मे अलग-अलग धर्मो में रक्षाबन्धन अलग-अलग लोक मान्यताओं के अनुसार मनाया जाता है।

पश्चिमी भारतीय लोग जैसे महाराष्ट्र इत्यादि में यह श्रावणी पूर्णिमा के नाम से मनाया जाता है इस दिन लोग नदी या समुन्द्र के तट पर जाकर जनेऊ बदलते हैं और समुद्र की पूजा करते है सामुद्रिक तटीय लोग इस दिन वर्ष के देवता इंद्रा और समुद्र के देवता वरुण की पूजा करते हैं उन्हें समुद्र में नारियल फेककर भेंट स्वरूप दिया जाता है। इसलिए इसे नारियल पूर्णिमा भी कहते हैं। मछुआरे इसी दिन से मछली पकड़ने की शुरुआत करते है।

दक्षिण भारतीय लोगो के अनुसार ऐसा कहा जाता है कि इसी दिन श्री राम ने माता सीता को छुड़ाने के लिए समुद्र में पत्थर फेककर पुल बनवाया था और अपनी यात्रा प्रारंभ की और विजय हासिल की थी। दक्षिण भारत मे रक्षाबन्धन को अवनी अबितम कहा जाता है यह ब्राह्मणों के लिए ज्यादा महत्व रखता है इस दिन ब्राह्मण जनेऊ बदलते हैं इसलिए इस दिन को ऋषि तर्पण भी कहा जाता है।

उतरी भरत में इसे कजरी पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। इस दिन खेत मे धान और दूसरे अन्य अनाज को बोया जाता है और माँ भगवती की पूजा की जाती है और अच्छे फसल की कामना की जाती है।

पूर्वी भारतीय पूरे श्रावण महीने में हर सोमवार को शिवलिंग के ऊपर जल चढ़ाते हैं और रुई को पंचकव्य में भिंगोकर शिवलिंग के चारो तरफ बांधते हैं। इसे पवित्रोपन्ना कहते है और श्रावण पूर्णिमा के दिन भाइयों के कलाई पर राखी बांधकर उनके सलामती की प्राथना की जाती है। इस दिन हिन्दू, जैन धर्म, सिख धर्म सभीधर्मो में बहन भाई को राखी बांधती है।

ग्रंथो के अनुसार रक्षाबन्धन को पूण्य प्रदायक कहा गया है इसलिए इस दिन हमे अच्छे कार्य करना चाहिए । इसे बिष नाशक भी कहा जाता है इस दिन सारे पापो का नाश होता है।

रक्षाबन्धन की तरह ही एक और ऐसा त्योहार है जो भाई बहन के प्यार को मजबूती प्रदान करता है। इसे भाईदूज कहा जाता है।

Raksha Bandhan शायरी 2020

आज के वर्तमान युग मे हर भाई बहन रक्षाबन्धन के दिन एक दूसरे की भावना व्यक्त करने के लिए प्यार भरी शायरी का प्रयोग कररते हैं। कुछज भाई बहन इतने दूर रहते है कि वे रक्षाबन्धन एक साथ नही माना पाते है लेकिन वे मोबाइल के जरिये रक्षाबन्धन शायरी का प्रयोग करके भी अपनी भावनाओं और प्यार को व्यक्त कर सकते है। रक्षाबन्धन से जुड़ी कुछ शायरी इस प्रकार हैं-

सावन के महीने में राखी का त्यौहार आता है
हर परिवार के लिए ढेरो खुशियां लाता है
रक्षा पर्व की कुछ अलग ही बात है
भाई बहन के लिए प्रेम की सौगात है

कच्चे धागों में समय हुआ है ढेर सारा प्यार और अपनापन
भाई और बहन का प्यार लेकर आया है फिर से सावन हैप्पी रक्षाबन्धन

भाई की कलाई पर राखी बांधे बहना
मांगती है वादा सदा संग ही रहना
बने रहे सदा ये रिश्ता बना रहे ये प्यार
सबको मुबारक हो रक्षाबन्धन का त्योहार

न मांगे धन और दौलत न मांगे वो उपहार
चाहत बहन की बस इतनी बनी रहे ये प्यार
गम ना कोई पास में आये खुशियो की हो बौछार
ऐसा ही संदेश लाता है यह राखी का त्योहार

कलाई पर सजा के राखी माथे लगा दिया है चंदन
सावन महीने के पावन अवसर पर सबको हैप्पी रक्षाबन्धन

भैया तुम जिओ हजारो साल
मील कामयाबी तुम्हे हर बार
खुशियो की हो बौछार
यही दुआ हम करते है हर बार

बहनो को भाइयों का साथ मुबारक हो,
भाइयो कु कलाइयों को बहनो का प्यार मुबारक हो
है यह सुख सदा आपकी जिंदगी में
आप सबको राखी का पावन त्योहार मुबारक हो

ये लम्हा कुछ काश है
बहन के हाथों में भाई का हाथ है
वो बहन तेरे लिए मेरे पास कुछ खास है
तेरी सुकून के खातिर मरे बहन तेरा भाई हमेशा तेरे साथ है

साधारण सा धागा नही ये विश्वास की डोर है
कोई तोड़ सके न इसे न किसी मे इतना जोर है
कौन कहता है कि अंत हो जाता है हर रिश्ते का
ये वो रिश्ता है जिसका कोई न कोई छोर है

भाई की खुशियों के खातिर मांगे बहन दुआएं
दुख की घड़ियां भाई के जीवन मे कभी न आये
बांध रही है राखी बहन माथे चंदन तिलक लगाएं
ऐसे शुभ घड़ी पर सबको रक्षाबन्धन की शुभकामनाएं

हमारे टीम की तरफ से  Happy Raksha Bandhan

चंदन की लकड़ी,फूलों का हार

अगस्त के महीना, सावन की फुहार

भाई की कलाई पर बहन का प्यार

मुबारक को आपको राखी का त्योहार

आप सभी भाई बहनों को हमारी तरफ से रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं ।

Conclusion

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