Purnima Vrat Katha एवं Snan पूर्णिमा स्नान के फायदे

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Purnima Vrat Katha and Snan Ke Fayade in Hindi – हेलो दोस्तो गंगाज्ञान पर आप सब का फिर से स्वागत है आज के इस पोस्ट में हम आपको Purnima Vrat Ki Katha एवं स्नान  विधि और फायदे के बारे में बताने वाले है अगर आप भी जानना चाहते है पूर्णिमा व्रत कथा और स्नान विधि के बारे तो हमारे इस पोस्ट को जरूर पढ़ें और अपने दोस्तों के साथ शेयर करें।

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हिन्दू धर्म में शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा के दिन व्रत और स्नान का बहुत महत्व है। इस दिन जो भी व्रत रहता है चन्दमा के दर्शन करने के बाद व्रत खोला जाता है। उस दिन सत्यनारायण भगवान की पूजा और एक समय भोजन कर व्रत किया जाता हैं। जिससे सुख सम्पति की प्राप्ति होती हैं।

Purnima Vrat और स्नान के फायदे

पूर्णिमा या पूर्णमासी का अर्थ सम्पूर्ण चंद्रमा यानि की जब चन्द्रमा अपने पूरे आकार में दिखाई देता हैं उस दिन को पूर्णिमा कहा जाता है। यह दिन बहुत महत्वपूर्ण माना जाता हैं। इस दिन व्रत, पूजा, स्नान दान आदि शुभ माने जाते हैं। इस दिन भगवान शिव, माँ पार्वती और विष्णु भगवान की पूजा की जाती हैं। शास्त्रों के अनुसार हिन्दू धर्म में वैशाख पूर्णिमा, कार्तिक पूर्णिमा, माघ पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता हैं।

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चंद्रमा की शान्ति और पारिवारिक शांति के लिए यह व्रत लाभदायक होता हैं। इस दिन शिव लिंग पर दूध, बेलपत्र, शमी पत्र आदि चढ़ाने से शिव जी की कृपा प्राप्त होती है और रोगों से मुक्ति मिलती हैं।

वैशाख पूर्णिमा

वैशाख पूर्णिमा का बहुत महत्व है क्योंकि भगवान विष्णु के कश्यप अवतार का जन्म दिन हैं। इसे कुर्मा जयंती के नाम से भी जाना जाता हैं संस्कृत भाषा मे कुर्मा का अर्थ कछुआ होता हैं। भगवान विष्णु ने इस दिन किसीहहुये के रूप में मंदराचल पर्वत को अपनी पीठ पर धारण करके समुद्र मंथन में सहायत की थी। इस दिन बुद्ध पूर्णिमा भी मनाया जाता है क्योंकि यह बौद्ध समुदाय का सबसे बड़ा त्यौहार हैं।

इस दिन भगवान बुद्ध को बौद्ध गया में पीपल के पेड़ के नीचे सत्य ज्ञान की प्राप्ति हुई थी यह दिन पीपल पूनम भी कहलाता हैं और इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता हैं यानी इस दिन कोई शुभ कार्य नही होता अगर कोई कार्य करना है तो किसी पंडित जी से पूछ कर किया जा सकता हैं

Kartik Purnima

यह कार्तिक स्नान का अंतिम दिन होता हैं इस दिन सुबह स्नान के बाद व्रत और सत्यनरायण भगवान की कथा होती हैं। जगह जगह गंगा तट पर लोग स्नान के लिए इकठ्ठा होते हैं जो मेले का रूप लेता हैं। पुराणों के अनुसार इस दिन विष्णु भगवान का मत्स्य अवतार हुआ था। और भगवान शिव ने त्रिपुरा नामक राक्षस के वध भी किया था इस लिए इसे त्रिपुरा पूर्णिमा भी कहा जाता हैं। राजस्थान के पुष्कर में इस दिन पशु मेला होता हैं। जिसे देखने विदेश से भी लोग आते हैं। यह मेला कार्तिक एकादशी से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक चलता हैं।

Maagh Purnima

माना जाता हैं कि माघ पूर्णिमा के दिन संगम नदी में स्नान करने से सभी दुख दर्द दूर हो जाता हैं इस दिन पवित्र नदी में स्नान करके सूर्य देव को अर्ध्य दिया जाता हैं। विष्णु भगवान की पूजा और स्तुति की जाती हैं। इस दिन यज्ञ तप किये जाते हैं। निर्धनों को धन, भोजन, कपड़ा तथा अन्य कई वस्तुओं का दान किया जाता हैं। माघ माह में इलाहाबाद शहर में स्थित संगम नदी तट पर बहुत विशाल मेला लगता हैं जिसमे साधु संत और भक्तगण इकठ्ठा होते हैं और कल्पवास करते हैं। यह मेला माघ पूर्णिमा पर समाप्त होता हैं।

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