Mobile Network Se Hone Wale Nuksan तथा उपाय

Mobile Network Se Hone Wale Nuksan तथा उपाय हेलो दोस्तों गंगज्ञान पर आप सब का फिर से स्वागत है। आज के इस पोस्ट में हम बात करेंगे Mobile Network के बारे में। Mobile Network Se Hone Wale Nuksan तथा उपाय इस पोस्ट में हम आपको पूरी जानकारी हिंदी में देने वाले हैं। अगर आप भी जानना चाहते है Mobile Network Se Hone Wale Nuksan तथा उपाय तो  हमारे इस पोस्ट को जरूर पढ़े और दोस्तों के साथ शेयर करे।

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Mobile Network Se Hone Wale Nuksan तथा उपाय मोबाइल हर दिन आधे घंटे मोबाइल पर बात से 8-10 साल में ब्रेन ट्यूमर की आशंका 400% तक बढ़ जाती है। जो की खतरे की घंटी हैं। आज के टैक्नोलॉजी दुनिया में मोबाइल फ़ोन एक जिंदगी का अहम् हिस्सा बन चूका है जिसे बिना कोई इंसान साइड ही होगा जो आज के इस दुनिया में मोबाइल फ़ोन नहीं चलता होगा पर इससे जितना फायदा है उतना ही नुकसान भी हैं आज के इस पोस्ट में हम जानेगे मोबाइल फ़ोन से होने वाले नुकसान के बारे में और इसके उपाय तो चलिए जानते है मोबाइल नेटवर्क से होने वाले नुकसान के बारे में।

Mobile Network Se Hone Wale Nuksan

Mobile Phone के बिना अब हम अपनी जिंदगी की कल्पना भी नहीं कर पाते। आदत ऐसी बन गई है कि जब कॉल नहीं होता तो भी हमें लगता है कि घंटी बज रही है। यह घंटी दरअसल खतरे की घंटी हो सकती है। Mobile Phone और Mobile Network से निकलने वाला रेडिएशन सेहत के लिए खतरा हो सकता है। अगर आप आपने  मोबाइल सेट पर *#07# डायल कर रेडिएशन की खुद भी जांच करते रहिए। तो मोबाइल रेडिएशन से होने वाले खतरों से काफी हद तक बचा जा सकता है। मोबाइल के लत से लोग बाहर नहीं निकल पा रहे है और न जाने कितने ला ईलाज बिमारियों को बुला रहे है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि इससे कैंसर का खतरा
पैदा हो सकता है। इससे जुड़ी एक कैंसर पीड़ित की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने भी गंभीरता से लिया है। मुंबई की उषा किरण बिल्डिंग में कैंसर के कई मामले सामने आने को Mobile Network रेडिएशन से जोड़कर देखा जा रहा है। फिल्म ऐक्ट्रेस जूही चावला ने सिरदर्द और सेहत से जुड़ी दूसरी समस्याएं होने पर अपने घर के आसपास से 9 Mobile Network को हटवाया।

Mobile Network से किस एरिया में नुकसान सबसे ज्यादा होता हैं?

Mobile Network के 300 मीटर एरिया में सबसे ज्यादा रेडिएशन होता है। ऐंटेना के सामनेवाले हिस्से में सबसे ज्यादा तरंगें निकलती हैं। जाहिर है सामने की ओर ही नुकसान भी ज्यादा होता है पीछे और नीचे के मुकाबले। Mobile Network से होनेवाले नुकसान में यह बात भी अहमियत रखती है कि घर टावर पर लगे ऐंटेना के सामने है या पीछे। इसी तरह दूरी भी बहुत अहम है। टावर के एक मीटर के एरिया में 100 गुना ज्यादा रेडिएशन होता है। टावर पर जितने ज्यादा ऐंटेना लगे होंगे, रेडिएशन भी उतना ज्यादा होगा।

Mobile Network का कितनी देर तकइस्तेमाल ठीक है?

दिन भर में 24 मिनट तक फोन का इस्तेमाल सेहत के लिहाज से नुकसान है। यहां यह भी बात अहम है कि आपके मोबाइल की SAR वैल्यू क्या है? क्योकि ज्यादा SAR वैल्यू के फोन पर कम देर बात करना कम SAR वैल्यू वाले फोन पर ज्यादा बात करने से ज्यादा नुकसानदेह होता है। लंबे वक्त तक बातचीत के लिए लैंडलाइन फोन का इस्तेमाल रेडिएशन से बचने का आसान तरीका है। इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि ऑफिस या घर में लैंडलाइन फोन का इस्तेमाल करें। कॉर्डलेस फोन के इस्तेमाल से बचें। SAR अमेरिका के नैशनल स्टैंडर्ड्स इंस्टिट्यूट के मुताबिक एक तय वक्त के भीतर किसी इंसान या जानवर के शरीर में प्रवेश करने वाली इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों की माप को एसएआर (स्पैसिफिक अब्जॉर्पशन रेश्यो) कहा जाता है। एसएआर संख्या वह ऊर्जा है, जो मोबाइल के इस्तेमाल के वक्त इंसान का शरीर सोखता है। मतलब यह है कि जिस मोबाइल की एसएआर संख्या जितनी ज्यादा होगी, वह शरीर के लिए उतना ही ज्यादा नुकसानदेह होगा।

भारत में SAR के लिए क्या हैं नियम?

अभी तक हैंडसेट्स में रेडिएशन के यूरोपीय मानकों का पालन होता है। इन मानकों के मुताबिक हैंडसेट का एसएआर लेवल 2 वॉट प्रति किलो से ज्यादा बिल्कुल नहीं होना चाहिए। लेकिन एक्सपर्ट इस मानक को सही नहीं मानते हैं। इसके पीछे दलील यह दी जाती है कि ये मानक भारत जैसे गर्म देश के लिए ज्यादा नुकसान नहीं हो सकते। इसके अलावा भारतीयों में यूरोपीय लोगों के मुकाबले कम बॉडी फैट होता है। इस वजह से हम पर रेडियो फ्रीक्वेंसी का ज्यादा घातक असर पड़ता है। हालांकि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित गाइडलाइंस में यह सीमा 1.6 वॉट प्रति किग्रा कर दी गई है जो कि अमेरिकी स्टैंडर्ड है।

मेट्रो या लिफ्ट में मोबाइल यूज करते वक्त क्या ध्यान रखें?

लिफ्ट या मेट्रो में मोबाइल के इस्तेमाल से बचें क्योंकि तरंगों के बाहर निकलने का रास्ता बंद होने से इनके शरीर में प्रवेश का खतरा बढ़ जाता है। साथ ही इन जगहों पर सिग्नल कम होना भी नुकसानदेह हो सकता है। जिससे आपको नुकसान हो सकता हैं।

Mobile को कहां रखें?

मोबाइल को कहां रखा जाए इस बारे में अभी तक कोई आम राय नहीं बनी है। यह भी साबित नहीं हुआ है कि मोबाइल को पॉकेट आदि में रखने से सीधा नुकसान है पेसमेकर के मामले को छोड़कर। फिर भी एहतियात के तौर पर महिलाओं के लिए मोबाइल को पर्स में रखना और पुरुषों के लिए कमर पर बेल्ट पर साइड में लगाए गए पाउच में रखना सही है।

किस Mobile का कितना SAR?

ज्यादातर मोबाइल फोन्स का एसएआर अलग-अलग होता है:

  • लजी र्यूमर2 1.51
  • सोनी एरिक्सन W350a 1.48
  • एपल आईफोन-4 1.51
  • सैमसंग Soul 0.24
  • नोकिया 9300 0.21
  • सैमसंग गैलेक्सी S-2 0.338
  • ब्लैकबेरी कर्व- 08310.72

यह पता करने के लिये की क्या ऐंटी रेडिएशन चिप के प्रायोग करने से इससे बचा जा सकता है आईआईटी बीएचयू में इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के हेड प्रोफेसर सत्यब्रत जीत से संपर्क किया प्रोफेसर सत्यब्रत जीत ने बताया, ”मोबाइल से रेडिएशन होता है और उसको नापा भी जा सकता है। इसका असर क्या होता है ये वैज्ञानिक तौर पर साबित नहीं हुआ है रेडिएशन का शरीर पर क्या असर पड़ता है इसकी कोई पुख्ता वैज्ञानिक रिपोर्ट नहीं है.”

प्रोफेसर सत्यब्रत जीत ने आगे बताया, ”मोबाइल बेस स्टेशन के साथ तो हमेशा ही रेडिएट करता रहेगा उसको जीरो नहीं किया जा सकता अगर रेडिएशन जीरो कर देंगे तो मोबाइल कनेक्शन खो देगा किसी चिप के द्वारा इसको कम किया जा सकता है पर ख़तम नहीं किया जा सकता ।

एक्सपर्ट ने बताई बेहद अहम बात

एक्सपर्ट के मुताबिक हमारे मोबाइल फोन में दो तरह के रेडिएशन होते हैं. एक माइक्रोवेव रेडिएशन और दूसरा हीटिंग रेडिएशन होता है माइक्रोवेव रेडिएशन वो रेडिएशन है जिससे मोबाइल फोन मोबाइल टावर से मिलने वाले सिग्नल से कनेक्ट करता है।

हीटिंग रेडिएशन फोन आने पर या फोन के इस्तेमाल के वक्त मोबाइल के गर्म होने पर पैदा होता है। ऐसे में माइक्रोवेव रेडिएशन को तो रोकना मुमकिन नहीं है क्योंकि उसको रोकने से फोन से सिग्नल ही गायब हो जाएगा. फोन के इस्तेमाल से जो हीटिंग रेडिएशन होता है उसे कम किया जा सकता है. वैज्ञानिक तौर ऐसी किसी चिप का कोई आधार नहीं है. जो किसी भी तरह के रेडिएशन को रोक सके

प्रोफेसर सत्यब्रत जीत के बाद हमने इंडियन सेलुलर एसोसिएशन के नेशनल प्रेसिडेंट पंकज महेंद्रू से संपर्क किया. पंकज महेंद्रू ने बताया कि इस तरह का कोई भी प्रोडक्ट मार्केट में बिना अंतरराष्ट्रीय मानक के स्तर पर सर्टिफिकेट लिए नहीं आ सकता. रेडिएशन की टेस्टिंग बड़े ही सॉफिस्टीकेटेड यंत्र से होती है. ऐसे किसी यंत्र से रेडिएशन की जांच नहीं की जा सकती. टेलीकॉम मंत्रालय की सरकारी संस्था को ही रेडिएशन जांच करने का अधिकार है. ऐसा कोई प्रोडक्ट नहीं है जो पहले से कम रेडिएशन के लेवल को और कम कर दे. इस वीडियो में कोई वैज्ञानिक और तकनीकी तथ्य नहीं है।

आप जिस विषय के बारे में जानना और पढ़ना चाहते हैं, हमें लिखें। ज्यादा मांग वाले विषयों पर हम आपको देंगे ।
मोबाइल का लत को छोड़ना मुश्किल तो है, उम्मीद हैं कि Mobile Network Se Hone Wale Nuksan तथा उपाय का यह पोस्ट आपको पसंद आई होगी।  आप हमारे इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ शेयर करे ताकि हम इसी नई नई जानकारिया आप सब के लिए हिंदी में लिख सके। अगर आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो आप हमें नीचे Comment Box में बता सकते हैं।

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