Maa Laxmi Puja Vidhi लक्ष्मी जी की कथा एवं पूजा विधि

Maa Laxmi Puja Vidhi and Katha jane Kaise Kiya Jata Hai Mata Laxmi ji ko Prashan Sampurn Puja Vidhi, Katha and Arti

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Maa Laxmi Puja Vidhi and Katha in Hindi – हैलो दोस्तो गंगाज्ञान पर आप सब का फिर से स्वागत हैं आज के इस पोस्ट में हम आपको बताएँगे Maa Laxmi Puja Vidhi and Katha के बारे में। अगर आप भी जाना चाहते है Mata Laxmi Ki Puja Vidhi के बारे में तो हमारे इस पोस्ट को जरूर पढ़ें और अपने दोस्तो के साथ शेयर करें।

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माता लक्ष्मी जी की पूजा कार्तिक मास के अमावस्या के दिन यानि Diwali के त्योहार के दिन माँ लक्ष्मी जी पूजा पुरे देशभर में की जाती है। इस बार 27 October को देश भर में दिवाली का त्योहार मनाया जाएगा। इस दिन मां लक्ष्मी जी की पूजा की जाती हैं। यह दिन माता लक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त करने का बहुत ही शुभ दिन माना जाता हैं। मान्यता है की दीवाली के दिन दीपों की रोशनी से खुश हो कर मां लक्ष्मी घर आती हैं। आइये जानते है Maa Laxmi Puja Vidhi and Katha के बारे में।

क्यों मनाई जाती है दीवाली (Why Celebrate Diwali?)

भगवान् विष्णु जी ने अहंकाररूपी रावण का वध करने के लिए माँ लक्ष्मी जी के साथ राम – सीता के रूप में धरती पर अवतार लिए थे। उन्होंने अपने पिता राजा दशरथ के आज्ञा अनुसार अपनी पत्नी और अपने छोटे भाई लक्षमण के साथ 14 वर्ष के लिए वनवास गए थे उसी बीच उन्होंने रावण का वध किया था। और 14 वर्ष वनवास काटने के बाद वे अपनी पत्नी और छोटे भाई लक्षमण के साथ अपने घर आये थे उस दिन पुरे अयोध्यावासी दीपक जलाकर भगवान् राम और माता सीता का स्वागत किये थे इसी दिन को हर वर्ष दीपावली के रूप में मनाया जाता है।

दीपावली पर क्यो किया जाता हैं माँ Laxmi की पूजा

कार्तिक माह के अमावस्या के दिन लक्ष्मी माता समुद्र मंथन से निकली हुई थी। जब देवताओं और दैत्यों ने मिल कर जब समुद्र मंथन किया तो उसमें से 14 रत्न निकले जिसमें देवी लक्ष्मी भी थी। जैसे ही देवी लक्ष्मी समुद्र से बाहर निकली उन्हें पाने के लिए सब व्याकुल थे। सबसे पहले दैत्यों ने देवी लक्ष्मी से आग्रह किया की आप मेरे पास आ जाओ तो देवी लक्ष्मी ने कहा तुम्हे सात्विक अहंकार है। इसलिए मैं आपके पास नही आऊँगी। अहंकार मुझे बिल्कुल पसंद नही हैं।

देवताओं ने आग्रह किया आप इन्द्र देव के नेतृत्व में हमारी हो जाओ। देवी लक्ष्मी ने कहा में आपके पास बिल्कुल नही आऊँगी क्योकि आप देवता बनते है पूण्य से और पुण्य से देवी लक्ष्मी को प्राप्त नही किया जा सकता। फिर उन्होंने ने देखा कि एक ऐसा देव पुरूष है जो मेरी तरफ ध्यान ही नही दे रहा हैं। देवी उनके पास गई तो देखा कि भगवान विष्णु आराम से लेटे हुए थे। देवी लक्ष्मी ने भगवान विष्णु के पैर पकड़ के हिलाए तो विष्णु जी बोले क्या बात है। देवी लक्ष्मी ने कहा मैं आपकी सेवा करना चाहती हूँ। विष्णु जी ने कहा स्वागत हैं। लक्ष्मी जी जानती थीं। भगवान विष्णु मेरी रक्षा करेंगे। भगवान विष्णु सृष्टि के पालनकर्ता हैं इसलिए वे परिश्रमी और पुरूषार्थी हैं।

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देवी लक्ष्मी न अहंकारी के पास जाती हैं ना पुण्य कमाने वाले के पास वे सिर्फ परिश्रमी और पुरूषार्थी के पास जाती हैं। इसीलिए दीपावली के दिन ही दीपक जलाकर उनका स्वागत किया जाता हैं।

माँ लक्ष्मी को कैसे प्रसन्न करें।

माता लक्ष्मी जी को प्रसन्न करना बहुत ही सरल हैं ज्यादातार लोगों को इसकी जानकरी नही होती हैं। आइये जानते हैं की माँ लक्ष्मी कैसे प्रसन्न होती है। दीपावली के दिन लक्ष्मी जी का पूजन पूरे विधि विधान से करना चाहिए उसके बाद घर के सभी कमरों में शंख और घंटी बजाना चाहिये इससे घर की सारी निगेटिविटी दूर हो जाएगी। पूजा के बाद महालक्ष्मी के महामंत्र कमलगट्टे की माला से 108 बार जाप करना चाहिए। माता लक्ष्मी के पूजा में पीली कौड़िया जरूर रखे इससे धन संबंधी परेशानियां दूर होती हैं। इस दिन पीपल के पेड़ में जल जरूर दे इससे माता लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं।

Maa Laxmi Puja Vidhi in Hindi

दीवाली के दिन मां लक्ष्मी की पूजा में सबसे पहले एक चौकी पर सफेद वस्त्र बिछा कर उस पर माँ लक्ष्मी, सरस्वती और गणेश जी का चित्र या प्रतिमा को विराजमान करें। इसके बाद पूजा आसन और स्वयं को जल छिड़क कर पवित्र कर लें। इस पूरी प्रक्रिया के बाद मन को शांत कर आंखे बंद करें। इसके बाद हाथ में जल लेकर पूजा का संकल्प करें। संकल्प के लिए हाथ में अक्षत, पुष्प और जल ले लीजिए साथ मे सिक्का भी ले। इन सभी को हाथों में लेकर संकल्प करे कि मैं अमुक व्यक्ति अमुक स्थान व समय पर माँ लक्ष्मी, सरस्वती तथा गणेश जी की पूजा करने जा रहा हू। इसके बाद सबसे पहले भगवान गणेश जी व गौरी का पूजा करे फिर कलश का पूजा करे फिर नवग्रहों का पूजन कीजिए। इसके बाद भागवती षोडश मातृकाओं का पूजन किया जाता है। इन सभी के पूजन जे बाद 16 मातृकाओं को गंध, अक्षत और पुष्प प्रदान करते हुए पूजन करें।

मौलि लेकर गणपति जी माता लक्ष्मी और सरस्वती जी को अर्पित कर स्वंय के हाथों पर भी बाँध ले। तिलक लगा कर महालक्ष्मी जी का पूजा आरम्भ करें। सबसे पहले भगवान गणेशजी, लक्ष्मी जी का पूजन करें। उनकी प्रतिमा के आगे 7,11 या 21 घी का दीपक जलाएं तथा मां को श्रृंगार सामग्री अर्पण करें। मां को भोग लगा कर उनकी आरती करें। श्रीसूक्त, लक्ष्मीसूक्त और कनकधारा स्रोत का पाठ करे । इससे मा लक्ष्मी प्रसन्न होती है इस तरह से पूजा पूर्ण होती हैं ।

पूजा पूर्ण होने के बाद आप मा लक्ष्मी से क्षमा प्रार्थना कर अनजाने में हुए भूल के लिए माफी मांग ले।

माँ न मैं आवाह्न करना जानता हूँ, न विसर्जन करना। पूजा-कर्म भी मैं नही जानता। हे परमेश्वरि! मुझे क्षमा करो। मन्त्र, क्रिया और भक्ति से रहितजो कुछ पूजा मैंने की हैं, हे देवी! यह मेरी पूजा सम्पूर्ण हो। यथा सम्भव प्राप्त उपचार वस्तुओं से मैंने जो यह पूजन किया हैं उससे आप भगवती श्रीलक्ष्मी प्रसन्न हो।

श्री लक्ष्मी जी की आरती

ॐ जय लक्ष्मी माता मैया जय लक्ष्मी माता
तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता।। ॐजय लक्ष्मी माता…..
उमा, रमा, ब्राह्मणी, तुम जग की माता
सूर्य चन्दमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता।। ॐ जय लक्ष्मी माता….
दुर्गारूप निरंजनी, सुख सम्पति दाता
जो कोई तुमको ध्याता, रिद्धि सिद्धि धन पाता।। ॐ जय लक्ष्मी माता….
तुम ही पाताल निवासिनी, तुम ही शुभदाता
कर्मप्रभाव प्रकाशनी, भवनिधि कीत्राता।। ॐ जय लक्ष्मी माता….
जिस घर तुम रहती हो, ताहि में हैं सद्गुण आतआ
सब सम्भव हो जाता मन नही घबराता।। ॐ जय लक्ष्मी माता….
तुम बिन यज्ञ ना होता, वस्त्र न कोई पाता
खान पान का वैभव, सब तुमसे आता।। ॐ जय लक्ष्मी माता….
शुभ गुण मंदिर, सुंदर क्षिरनिधि जाता
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नही पाता।। ॐ जय लक्ष्मी माता….
महालक्ष्मी जी की आरती, जो कोई नर गाता
उर आनंद समाता, पाप उत्तर जाता।। ॐ जय लक्ष्मी माता….
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता
तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता।। ॐ जय लक्ष्मी माता….

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