Karwa Chauth क्यों मनाया जाता है? ब्रत कथा लाभ एवं पूजा विधि

Karwa Chauth Vrat Katha Puja Vidhi and 2019 me Karwa Chauth Puja Kab hai Puri Jankari Padhe Hindi Hindi Me

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Karwa Chauth Vrat Katha, Puja Vidhi in Hindi – हेलो दोस्तो गंगाज्ञान पर आप सब का फिर से स्वागत हैं। आज के इस पोस्ट में Karwa Chauth Puja के बारे में पूरी जानकारी हिंदी में देने वाले हैं। अगर आप भी जानना चाहते हैं करवा चौथ पूजा विधि तो हमारे इस पोस्ट को जरूर पढ़ें और अपने दोस्तों के साथ शेयर करें

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करवा चौथ हिन्दुओ का एक प्रमुख त्योहार हैं। यह त्योहार महिलाओं के लिए बहुत ही खास होता हैं। महिलाएं इस दिन का पूरे साल बेसब्री से इंतजार करती हैं। इस दिन अपने पति के लम्बी उम्र के कामना के लिए व्रत रखा जाता हैं। यह भारत के झारखण्ड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, मध्य प्रदेश, बिहार और राजस्थान में अत्यधिक मनाया जाता हैं। तो चलिए हम विस्तार से जानते है करवा चौथ व्रत के बारे में।

Karwa Chauth Kab Manay Jata Hai?

करवा चौथ यह कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि को मनाया जाता हैं। यह पर्व सौभाग्यवती(सुहागिन) महिलायें मानती हैं। यह व्रत सुबह सूर्योदय से पहले करीब 4 बजे के बाद शुरू होकर रात में चंद्रमा दर्शन के बाद संपूर्ण होता हैं। ग्रामीण स्त्रियों से लेकर आधुनिक स्त्रियाँ तक सभी महिलाएं इस व्रत को बड़ी श्रद्धा और उत्साह से रखती हैं। शास्त्रों के अनुसार यह व्रत पति की दीर्घायु एवं अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखा जाता है। इस दिन भालचन्द्र गणेश जी की पूजा अर्चना होती हैं।

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करवा चौथ में संकष्टीगणेश चतुर्थी के तरह दिन भर उपवास रखकर रात में चंद्रमा को अर्ध्य देने के बाद भोजन करने का विधान हैं। बहुत सारी महिलायें अपने परिवार में चल रहे प्रथा के अनुसार ही मनाती हैं। लेकिन निराहार रह कर चन्द्रोदय की प्रतीक्षा करती है उसके वाद ही व्रत खोलती हैं। यह व्रत 12 वर्ष तक अथवा 16 वर्ष तक लगातार हर वर्ष किया जाता हैं। अविधि पूरी होने के पश्चात इस व्रत का उद्यापन किया जाता है। जो सुहागिन स्त्रियाँ आजीवन रखना चाहती है वह इस व्रत को जीवन भर रख सकती हैं। इस व्रत के समान सौभाग्यदायक व्रत और कोई दूसरा नही हैं। और सुहागिन स्त्रियाँ सुहाग की रक्षार्थ इस व्रत के पूरे विधान से करती हैं। वर्ष 2019 में यह पर्व 17 October 2019 को मनाया जायेगा। 

Karwa Chauth Puja Vidhi

जो सुहागिन महिलाएं पहली बार इस व्रत को करने की सोच रही है उनके लिए गंगा ज्ञान पुरे विधि विधान से इस व्रत की पूजा विधि का उल्लेख किया है तो आइये जानते है करवा चौथ के पूजा विधि के बारे में जिसे कर के हर सुहागिन स्त्रियाँ अपने सुहाग की लम्बी उम्र की कामना करती हैं।

पहला चरण – सुहागिन महिलाएं सुबह सुबह-उठकर स्नान आदि करने के बाद साफ कपङे पहने और आपने सास की दी हुई सरगी खा कर व्रत का संकल्प ले।

दूसरा चरण – घर के मंदिर की दीवार पर गेरू से फलक बनाये और चावल पीस कर उससे करवा का चित्र बनाये। हिन्दू धर्म मे इस रीत को करवा धारन कहा जाता हैं।

तीसरा चरण – साम को माँ पार्वती और शिव भगवान और गणेश जी का चित्र रख कर उनका ध्यान करना चाहिए।

चौथा चरण – इसके बाद करवा का विधि पूर्वक पूजा करे और कथा सुने। आप चाहे तो किन्ही पंडित जी को बुला कर करवा चौथ की कथा सुन सकती है या आप खुद से भी करवा चौथ का किताब लेकर कथा पढ़ सकती है। वैसे निचे भी हमने करवा चौथ की कथा का उल्लेख किया है।

पांचवा चरण – रात में चंद्रमा निकलने पर विधि पूर्वक चंद्रमा के पूजा करें।

छठा चरण – उसके बाद अपने पति का चेहरा देख कर औऱ बड़ो का आशीर्वाद ले कर अपने पति के हाथों से पानी पी कर व्रत तोड़े।

Karwa Chauth Vrat Katha

करवा चौथ की पौराणिक कथा के अनुसार एक नगर में एक साहूकार रहता था। उसके सात बेटे और एक बेटी थी, एक बार करवा चौथ के दिन घर मे साहूकार की पत्नी और बाहु बेटियों ने करवा चौथ का व्रत रखा। करवा चौथ के दिन पकवान बना, सभी खाने के लिए बैठे। उस समय चाँद नही निकला था जिसके कारण सिर्फ पुरूष खाने के लिए बैठे। जिसमे सभी भाई भी बैठे। उन्होंने अपने बहन को भी खाने के लिए बुलाया लेकिन उनकी बहन ने खाने से इनकार कर दिया और कहा कि चाँद निकलने के बाद पूजा कर के ही वह खाना खाएगी।

बहन की बात सुनकर सभी भाइयो ने मिलकर दूर पेड़ पर चढ़ कर एक भाई ने दीपक जलाकर छलनी में दिखा कर कहा कि देखो बहन चाँद निकल आया है आकर पूजा करके व्रत खोल लो बहन खुशी से अपने भाभियों को बोली चलो चाँद निकल आया उसके भाभी बोली तुम्हरा चाँद निकला है तुम जाओ और वह चली गई उसके भाइयों ने जो छनि में चाँद दिखाया उसे वह पूजा कर अपना व्रत खोल ली।

जैसे ही खाने के लिए बैठी तभी ससुराल से बुलावा आ गया और वह ससुराल के लिए जाने लगी तो उसकी माँ ने उसे कुछ सिक्के दिए और बोली कि जो भी रास्ते मे मिले उससे आशीर्वाद लेना और जो सौभाग्यवती का आशीर्वाद दे उसे एक सिक्का बाँध देना परन्तु उसे किसी ने सौभाग्यवती का आशीर्वाद नही दिया जब ससुराल पहुची तो उसके सास ने उसे सौभाग्यवती का आशिर्वाद दिया। जब वह अंदर गई तो उसने अपने पति को मूर्छित हालत में देखी और रोने लगी किसी ने उसे बताया कि ये सब करवा माता के गुस्सा के कारण हुआ है और वह हर महीने करवा माता की पूजा कर प्रसन्न करें।

वह हर करवा चौथ के दिन पूजा करती पर करवा माता घूम कर चली जाती थी उसके तरफ देखती भी नही थी फिर भी वह हर महीने करवा माता का व्रत करती, एक वर्ष तक करती रही फिर कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि के दिन करवा माता प्रसन्न हो कर सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद दिया और फिर उसका पति भी स्वस्थ हो गया। इसी कारण कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि को करवा चौथ का महत्व है और इसी दिन करवा चौथ का व्रत किया जाता है।

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