भारत में बहने वाली 25 प्रमुख नदियों कि विस्तृत जानकारी

Indian Rivers Bharat Ki nadiyon ke bare me puri Jankari Hindi Me

भारत की 25 प्रमुख नदियों की विस्तृत जानकारी (Indian Rivers in Hindi) – हेलो दोस्तों गंगा ज्ञान पर आप सब का फिर से स्वागत है आज के इस पोस्ट मे हम बात करेंगे भारत में बहने वाली प्रमुख नदियों के बारे में। जैसा की हम सब जानते है हमारा भारत देश वेद पुराणों के अनुसार प्रकृति के रहस्यों से भरा हुआ है जहां पर प्रकृति ने खुल कर अपनी सुंदरता लुटाई है जिनमे से कुछ प्रचलित नदियां भी है। आज हम उन्ही प्रचलित नदियों के बारे में (Indian Rivers in Hindi) बिस्तार से बताने वाले है यदि आप भी इन नदियों के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते है तो हमारे इस पोस्ट को ध्यान से पढ़े।

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वैसे तो भारत में बहुत सी छोटी बड़ी नदियां है परन्तु हम कुछ प्रमुख नदियों के बारे में बात करेंगे जो भारत की प्राचीन सभ्यता का एक महत्वपूर्ण अंग है साथ ही हमारे भारत देश के कुछ धार्मिक स्थलो की भी एक पहचान है।

भारत मे बहने वाली 25 प्रमुख नदियाँ (Indian Rivers)

हमारे देश को नदियों का देश भी कहा जाता है क्योंकि आज भी हमारे देश मे नदियों की पूजा की जाती हैं साथ ही हमारे देश के बहुत सारी नदियों को माता कह कर के भी पुकारा जाता है। तो आइए जानते है कुछ प्रमुख नदियों के बारे में जो हमारे भारत देश मे बहुत प्राचीन हैं।

सिंधु नदी (Sindhu River)

यह विश्व की सर्वाधिक बड़ी नदियों में से एक है यह नदी तिब्बत में मानसरोवर झील के निकट समुद्र तल से 5 ,180 मी० की ऊंचाई पर से निकलती है जिसकी कुल लम्बाई- 2880 किमी है और क्षेत्रफल 3 ,21 ,290 वर्ग किमी है। भारत में सिंधु नदी की कुल लम्बाई -709 किमी है। सिंधु नदी में पर्वतीय क्षेत्र से मिलने वाली मुख्य सहायक नदियां – गिलगित, श्योक, स्कार्डू और सिगु है मैदानी क्षेत्र में मिलने वाली सहायक नदियां -झेलम, चेनाब, रावी सतलज और व्यास है।

झेलम नदी (Jhelam River)

यह कश्मीर क्षेत्र की एक महत्त्वपूर्ण नदी है इसका उद्गम कश्मीर में पीरपंजाल की पहाड़ियों में स्थित वेरीनाग के झरने से होता है इसकी कूल लम्बाई 400 कि0मी0 है तथा भारत में इसका क्षेत्रफल 28,490 वर्ग किमी है।

इसकी द्रोणी बृहत् हिमालय और पीरपंजाल की पहाड़ियों के बीच अवस्थित है। यह पाकिस्तान में प्रवेश से पूर्व कश्मीर घाटी और बुलर झील से होकर बहती है तथा झांग के निकट यह चेनाब नदी से मिलती है।

चिनाब नदी (Chinaab River)

यह नदी सिंधु नदी की सहायक नदियों में सबसे बड़ी नदी है। यह हिमाचल प्रदेश के लाहौल -स्पीति में बर्फ से ढकी पहाड़ियों से निकलती है। इसकी कुल लम्बाई भारत में 1800 किमी ० है तथा क्षेत्रफल 26755 वर्ग किमी है। यह नदी बृहत् हिमालय और पीरपंजाल की पहाड़ियों के बीच 290 किमी लम्बे महाखंड से होकर बहती है।

रावी नदी (Ravi River)

यह नदी हिमाचल प्रदेश में पीरपंजाल (कुल्लू पहाड़ियों) की दक्षिणी ढलान से निकलती है इसकी कूल लम्बाई 725 किमी तथा क्षेत्रफल भारत में 5957 वर्ग किमी ० है।

सतलज नदी (Satlaj River)

यह सिंधु नदी की दूसरी सबसे बड़ी सहायक में से एक है यह तिब्बत में समुद्र तल से 4555 मी की ऊंचाई पर स्थित राकास झील से निकलती है। भारत में इसकी कूल लम्बाई 1 050 किमी तथा क्षेत्रफल 24087 वर्ग किमी है। यह भारत में शिपकिला से प्रवेश करती है तथा हिमाचल प्रदेश और पंजाब से प्रवाहित होते हुए पाकिस्तान में प्रवेश कर जाती है।

व्यास नदी (Vyas River)

यह नदी समुद्र तल से 4000 मी की ऊंचाई पर कुल्लू पहाड़ियां से निकली है, भारत मे इसकी कुल लम्बाई 470 किमी तथा क्षेत्रफल 25900 वर्ग किमी है। यह हरिक के निकट सतलज से मिलती है।

गंगा नदी (Ganga River)

यह नदी Indian Rivers में बहुत ही पवित्र तथा पूजनीय है यह मनुष्य के सारे पापों को धो देती है इसके जल का प्रयोग सभी पुण्य कार्यों में किया जाता है। यह नदी बृहत् हिमालय में गंगोत्री नामक ग्लेसियर (हिमानी ) से निकलती है इसलिए इसका जल किसी भी पात्र में रखने पर भी ख़राब नहीं होता है।

देवप्रयाग से पहले यह भागीरथी कहलाती है और देवप्रयाग में अलकनंदा से मिलने के बाद इसका नाम गंगा हो जाता है। इसकी कुल लम्बाई 2525 किमी है जिसमे 1450 किमी की दूरी यह उत्तरांचल तथा उत्तरप्रदेश में और 445 किमी की दुरी बिहार में तथा 520 किमी की दुरी पश्चिम बंगाल में तय करती है।

यह भारत की सबसे बड़ी नदी द्रोणी है जिसका क्षेत्रफल 838 ,200 वर्ग किमी ० है रामगंगा, गोमती, घाघरा , बूढ़ी गंडक , कोसी इसकी बाएं किनारे पर तथा यमुना , सोन दाएं किनारे पर मिलने वाली सहायक नदियां है।

मुख्य नदी की एक शाखा भागीरथी हुगली इसके प्रवाह मार्ग के पश्चितम छोर से निकल कर बंगाल की खाडी में मिलती है। फरक्का से आगे इसकी एक शाखा भागीरथी हुगली के नाम से पश्चिम बंगाल में तथा दूसरी शाखा पद्मा – मेघना के नाम से बांग्लादेश में प्रवेश करती है और अंततः बंगाल की खाड़ी में समा जाती है।

यमुना नदी (Yamuna Indian Rivers)

यह Indian Rivers में से गंगा की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण सहायक नदी है। यह नदी गंगा के उदगम श्रोत से पश्चिम में स्थित यमुनोत्री ग्लेशियर (हिमानी ) से निकलती है। उद्गगम श्रोत से इलाहाबाद तक इसकी कूल लम्बाई 1376 किमी है इसकी क्षेत्रफल 359000 वर्ग किमी है इसकी महत्वपूर्ण सहायक नदियां चम्बल जो महू में विन्ध्यपर्वत से निकलती है, सिंध, बेतवा और केन है ।

सरस्वती नदी (Sarswati River)

सरस्वती नदी का उद्गम स्थल उत्तराखंड से आगे भीमपुर के माणा गाँव जो भारत की आखिरी गाँव है कि पहाड़िया है। यह समुद्र तल से 10133 फिट उप्पर दो पहाड़ो के बीच से निकली है।

ऐसा माना जाता है कि सरस्वती नदी जब अवतरित हुई थी तो इनके तेज वेग से पहाड़ दो भागों में खण्डित हो गई थी इस नदी की गर्जना साफ़- साफ़ सुनाई देती है यह नदी आगे चलकर यहीं पर विलुप्त हो गई।

इस नदी के तेज गति के कारण से जब महर्षि व्यास महाभारत की रचना कर रहे थे तो यह सब गणेश जी को सुनाई नहीं दे रहा था तभी ऋषी व्यास ने विलुप्त होने का श्राप दे दिया तभी से यह नदी वही पर पृथ्वी के गर्भ में विलुप्त हो गई है। कही- कही भूमि छिछला होने के कारण यह नदी दिखाई देती है जो गर्मियों के दिनों में सुख जाती है। इसके अलावे यह नदी कही हल्की जलधारा के साथ बहती हुई नजर आती है। इसी तरह अंतत यह नदी प्रयाग में जाकर गंगा नदी और यमुना नदी से मिलती है ।

सोन नदी (Sone River)

यह नदी अमरकंटक पठार से निकलती है इसकी लंबाई 780 km और क्षेत्रफल 71900 वर्गकिमी है। यह गंगा के दाहिने किनारे से मिलने वाली सहायक नदी है। जो रामनगर के पास गंगा से मिलती हैं।

रामगंगा नदी (Ramganga River)

यह नदी नैनीताल के निकट कुमाऊं क्षेत्र में हिमालय से निकलती है इसकी लंबाई 690k m और क्षेत्र फल 32,800 वर्ग किमी है। यह फर्रुखाबाद के बाद गंगा के बाएं किनारे से मिलती है।

घाघरा नदी (Ghaghra River)

घाघरा नदी गंगोत्री नामक ग्लेसियर के बाएं किनारे से निकलती हैं इसकी कुल लम्बाई 1,080 km और क्षेत्रफल 1,27,500 वर्ग किमी है । इसकी नदी द्रोणी का आधे से अधिक हिस्सा नेपाल में है। यह छपरा (बिहार ) के निकट गंगा के बाएं किनारे से मिलती है ।

गंडक नदी (Gandak River )

यह नदी समुद्र तल से 7,600 m की ऊँचाई पर नेपाल – चीन सीमा के निकट मध्य हिमालय से निकलती है। भारत मे इसकी कुल लम्बाई 425 km है। पूरा क्षेत्र फल 48,500वर्ग किमी है ।भारत में क्षेत्रफल 9,500 वर्गकिमी है। यह नेपाल के मध्य भाग से होकर बहते हुए बिहार में प्रवेश करती है और उसके बाद दक्षिण – पूर्व मुड़कर सोनपुर (बिहार) के निकट गंगा के बाएं किनारे से मिलती है।

कोसी नदी(Kosi River)

कोसी नदी नेपाल – तिब्बत और सिक्किम के शिखर पर स्थित पहाड़ी क्षेत्र से निकलती है ।यह सोन कोसी ,अरुण कोसी और ताम्र कोसी नदियों के संगम द्वारा निर्मित एक नदी है।भारत में कुल लंबाई 425 km और क्षेत्रफल 21,500 वर्गकिमी है कुल क्षेत्रफल 86,900 वर्गकिमी है। यह पूर्वी नेपाल से होकर बहते हुए बिहार में प्रवेश होती है।और भागलपुर के बाद गंगा के बाएं किनारे से मिलती है।यह अपना परवाह मार्ग बार बार बदलती रहती है और बिहार में विनाशकारी बाढ़ का कारण बनती है।अतः इस नदी को बिहार का शोक भी कहा जाता है।

दामोदर नदी(Damodar River)

झारखंड के पलामू जिले के छोटा नागपुर पठार से निकलती है।इसकी लम्बाई 541km और क्षेत्रफल 22,000 वर्ग किमी है।यह पश्चिम बंगाल में गंगा की एक शाखा भागीरथी – हुगली से मिलती है।

स्वर्णरेखा नदी(Svarnrekha River)

स्वर्णरेखा नदी का उदगम स्थल रांची (झारखंड) से 16km दूर रानी चुआं , नगड़ी रांची से निकलती है ।इसकी लंबाई 474km है। नदी के भराव , खनन के कारण क्षेत्रफल में कमी होती रहती है।

यह एक पहाड़ी नदी है ज्यादातर पत्थरों से होकर गुजरती है इस नदी के बालू तथा कीचड़ को छानने के बाद आसानी से चावल के बराबर सोने के कण मिलती है। यहाँ की आदिवासी जनजाति सोने निकालने का कारोबार इसी नदी से करते हैं। कंकड़ी पथरीली रास्तों से गुजरने के कारण ज्यादा मात्रा में पत्थर का रिसाव होता है जिससे नदी के किनारे पत्थरों पर धाराएं बन जाती है ।

इसलिए इसे स्वर्णरेखा नदी कहते है।साथ ही साथ पत्थर के कण कच्चे सोने में तब्दील हो जाते है ।बड़े बड़े ब्यापारी यहां से सस्ते दामो में सोने खरीदकर मालामाल हो गए ।यह झारखंड ,पश्चिम बंगाल और ओडिसा के क्षेत्रों से होकर बहते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती है।यही सिर्फ एक ऐसी नदी है जो बिना किसी सहायक नदी के समुन्द्र में गिरती है।

ब्रह्मपुत्र या सांगपो (तिब्बत )(Brahmputra River) नदी

ब्रह्मपुत्र नदी कैलाश पर्वत श्रेणी में चेमायुंगडुंग ग्लेशियर (हिमानी) से निकलती है और मरियम -ला-दर्रा इसे मानसरोवर झील से पृथक करता है ।इसकी कुल लंबाई 2,900 km है ।यह विश्व की सबसे लंबी नदियों में से एक है ।इसका कुल क्षेत्रफल2,40,000 वर्ग किमी है । इसकी महत्वपूर्ण सहायक नदियां सुवनश्री, कामेंग ,धनश्री ,दिहांग, लोहित,तीस्ता ,तोर सा, मानस बूढ़ी दिहांग आदि है।

यह तिब्बत ,भारत और बांग्लादेश से होकर बहती है । तिब्बत में यह एक शुष्क क्षेत्र से होकर प्रवाहित होती है। अतः यहां इसमे ज्यादा जल नही होता और इसकी अपरदन क्षमता भी कम होती है जिससे उस क्षेत्र में नदी में गाद कम होता है ।
भारत मे इस नदी में भारी वर्षा और अनेक सहायक नदियों से विशाल मात्रा में जलराशि मिल जाने के कारण इसकी अपरदन क्षमता में वृद्धि होती है और नदी जल में गाद की मात्रा बढ़ जाती है ।गंगा के साथ मिलकर विश्व का सबसे बड़ा डेल्टा निर्मित करता है । यह नदी बंगाल की खाड़ी में गिरती है।

साबरमती नदी (Savrmati River)

इस नदी का उदगम अरावली पर्वत श्रेणी में स्थित मेवाड़ पहाडियां से हुआ है। नदी की कुल लम्बाई 320 km और क्षेत्रफल 21,674 वर्गकिमी (राजस्थान और गुजरात क्षेत्र में ) है। इसकी महत्वपूर्ण सहायक नदियाँ हाथमती ,सेधी और वकुल है। यह नदी अरबसागर में गिरती है ।

माही नदी(Mahi River)

समुद्रतल से 500 मी .की ऊँचाई पर स्थित विन्ध य पर्वत श्रेणी से यह नदी निकलती है इसकी कुल लम्बाई 533 km और क्षेत्रफल 34,862 वर्गकिमी है इसकी नदी द्रोणी मध्यप्रदेश ,राजस्थान और गुजरात राज्यो में विस्तृत है।यह नदी अरबसागर में गिरती है।

नर्मदा नदी(Narmda River)

यह मध्यप्रदेश में अमरकंटक पठार से निकलती है। उद्गम श्रोत से खंभात की खाड़ी में उसके जवारन्द मुख तक कि लम्बाई 1,312 km है । और क्षेत्रफल 98,496वर्गकिमी है जो मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र राज्यों में विस्तृत है।

इसके बाएं किनारे से मिलने वाली सहायक नदियां तावा ,बूड़ नर आदि है ।दाएं किनारे से मिलने वाली सहायक नदियां हीरान है। इस नदी पर विश्व प्रसिद्ध धुआँधार प्रपात (cloud of mist falls) अवस्थित है। यह विंध्य और सतपुड़ा पर्वत श्रेणियों के बीच स्थित एक गर्त से होकर प्रवाहित होती है। यह पश्चिम की ओर प्रवाहित होने वाली सबसे सबसे लंबी प्रायद्वीपीय नदी है। जो अरबसागर में गिरती है।

तापी नदी(Tapi River)

तापी नदी मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में सतपुड़ा की पहाड़ियों से मूलत ई के निकट से निकलती है । नदी की कुल लम्बाई 740km है। नदी द्रोणि का क्षेत्रफल 65,145वर्गकिमी (मध्यप्रदेश, राजस्थान ,महाराष्ट्र और गुजरात क्षेत्र में) है।

बाएं किनारे से मिलने वाली सहायक नदियां पूर्णा ,वेघर,गिरना ,बारी और punjhara है। दाहिने किनारे से मिलने वाली सहायक नदियां बेतुल,अरुणावती ,गंजल और गोमोई हैं। यह नर्मदा की जुड़वां बहन के नाम से भी जानी जाती है। यह सतपुड़ा और अजंता की पहाड़ियों के बीच बने यक गर्त से प्रवाहित होती है। यह प्रायद्वीप य भारत मे पश्चिम की बहनेवाली दूसरी सबसे लंबी नदी है।जो अरबसागर में गिरती है।

महानदी (Mahi Indian Rivers)

यह छतीसगढ़ में रायपुर जिले में उत्तरी पहाडियां से निकली हुई है। कुल लम्बाई 857km है ।इसकी क्षेत्रफल 141,600 वर्ग km है। जो मध्यप्रदेश ,उड़ीसा ,बिहार और महाराष्ट्र में विस्तरित है। इसके बाये किनारे से मिलने वाली सहायक नदियां सिओनाथ ,हसदो ,इब और मांड है। दाहिने किनारे से मिलने वाली सहायक नदियां टेल, ऊँग और जोंक है ।

गोदावरी नदी (Godavri River)

यह नासिक (महाराष्ट्र )के निकट सह्याद्री के उत्तर में स्थित त्रिम्बक पठार से निकलती है। यह प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी है ।इसकी कुल लम्बाई 1465km है ।तथा कुल क्षेत्रफल 312,812वर्ग किमी है। जिसका आधा क्षेत्र महाराष्ट्र राज्य में अवस्थित है। यह नदी आंध्रप्रदेश, मध्यप्रदेश ओडिसा और कर्नाटक राज्यों से होकर प्रवाहित होयो है। अतः इसका अपवाह क्षेत्र इन राज्यों में भी विस्तृत है।

यह प्रायद्वीपीय भारत का सबसे बड़ा नदी तंत्र है। यह नदी तंत्र भारत मे गंगा नदी तन्त्र के बाद दूसरा वृहत्तम नदी तंत्र है। बाएं किनारे से मिलने वाली सहायक नदियां पैनगंगा,वर्धा,वेनगंगा,इंद्रावती और सबरी है। दाहिने किनारे से मिलने वाली सहायक नदी मांजरा है।यह बंगाल की खाड़ी में गिरती है ।

कृष्णा नदी (Krishna River )

यह महाराष्ट्र में पश्चिमी घर मे महाबलेश्वर के उत्तरी भाग से निकली है। इसकी कुल लम्बाई 1400km है। तथा क्षेत्रफ़ल 258,948वर्ग km है। इसकी द्रोणी कर्नाटक आंध्रप्रदेश और महाराष्ट्र में अवस्थित है। इसकी महत्वपूर्ण सहायक नदियां भीमा, तुंगभद्रा,घटप्रभा,मालप्रभा,मूसी और कोयना है। यह पूर्व दिशा में बहने वाली दूसरी सबसे लंबी प्रायद्वीपीय नदी है। जो बंगाल की खाड़ी में गिरती है

कावेरी नदी (Kaveri Rivers)

यह कर्नाटक में पश्चिमी घाट की ब्रह्मगिरि पर्वत श्रेणी से निकलती है जो Indian Rivers में से एक बड़ी नदी है। इसकी लम्बाई 800कम है। और क्षेत्रफल 87,900 वर्गकिमी है। इसकी द्रोणी केरल ,कर्नाटक और तमिलनाडु राज्यों में अवस्थित है। इसके बाये किनारी से मिलने वाली सहायक नदियां हेरंगी, हेमवती, शिमशा,अर्कावती आदि है। दाएं किनारे से मिलने वाली सहायक नदियां कबानी,भवानी और अमरावती है। यह बंगाल की खाड़ी में गिरती है।

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