Happy Holi 2020 (What is Holi in Hindi) होली मनाने की पूरी जानकारी हिंदी में

Happy Holi 2020 (What is Holi in Hindi) Holika Dahan Kaise Manaya Jata hai,or Holika Dahan Kyo Manaya Jata Hai Puri Janakari Hindi me

Happy Holi 2020 (What is Holi in Hindi) Holi Kya Hai?– नमस्कार दोस्तो, गंगाज्ञान पर आप सबों का फिर से स्वागत है। जैसा कि हम सब जानते है कि होली भारतवर्ष में मनाए जाने वाले त्योहारों में से दूसरा सबसे बड़ा त्योहार है। यह त्योहार हिन्दुओ के द्वारा विशेष रूप से बड़ी धूम धाम से मनाई जाती है। यह त्योहार हिन्दू स्त्री,पुरुष,बच्चे सभी युवाओं द्वारा एक साथ मिल-जुल कर बड़े हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है ।

इस दिन लोग अपने दोस्तों और दुश्मनो सभी के साथ सभी दुश्मनी उनके गीले शिकवे भुलाकर एक दूसरे के साथ होली खेलकर आनंदित होते हैं। और एक दूसरे को गले लगा कर सपने अंदर की सभी बुराइयों का त्याग करते हैं । इस दिन धार्मिक और होली के गीत भजन भी गया जाता है।

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इस तरह होली का मतलब ही यह है कि हम अपने अंदर की सभी बुराइयों के अंत करके सभी के साथ प्रेमभावना की तरह व्यवहार करें और अपने अंदर,रिश्तों में,दोस्तो में दुश्मनो में प्रेम और अपनत्व की भावना और खुशियों से भर एहसास भर दें। इसके साथ ही होली के महान अवसर पर मिठाइयाँ बाटी जाती है। इस दिन लोग एक दूसरे को प्रमुख व्यजंनों पर दावत देकर अपनी खुशियां बाटते हैं।

तो दोस्तों चलिए आज हम आपको इस पोस्ट में होली से जुड़े सारे तथ्यों को उजागर करके बताने जा रहें हैं कि होली क्यों मनाया जाता है? होली क्या है? होलिका दहन क्यों मनाया जाता है? होलिका दहन कैसे मनाया जाता है ? होली मनाने का क्या उद्देश्य है? होली कितने प्रकार की होती है । होली कैसे मनाया जाता है? इत्यादि इन सब जानकारियों से अवगत होने के लिए यह पोस्ट जरूर पड़े और अपने दोस्तों,सहपाठियों के साथ शेयर करें। तो चलिए शुरू करते हैं–

Happy Holi 2020 (What is Holi in Hindi) Holi Kya Hai?

होली हिन्दुओ के द्वारा मनाया जाने वाला दूसरा सबसे बड़ा रंगों का त्योहार (Festival) है। होली का रंग सभी को अपने अंदर की बुराइयों (Evils) को जड़ से मिटाकर आपस मे जोड़ने का कार्य करता है। रिश्तों में स्नेह और अपनेपन की भावना का एहसास कराता है। इस तरह होली भारतीय संस्कृति (Indian culture) का प्रतीक है। होली का रंग अनेकता के एकता का प्रतीक माना जाता है।

होली के रंगों में प्रेम,स्नेह और अपनापन कूट कूट कर भरा होता है। अंततः होली बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इसलिए अच्छाई की जीत पर होली मनाने का प्रचलन शुरू हुआ।

Happy Holi 2020 होली क्यों मनाया जाता है? (Why Celebrate Holi?)

होली मनाने के पीछे एक बहुत ही पौराणिक ईश्वरीय कथा प्रचलित है। वैसो तो हम सब ने सुना ही है कि करुणासागर भगवान विष्णु के 10 अवतार है–मत्स्य अवतार,कूर्म अवतार,वामन अवतार,बुद्ध अवतार,वराह अवतार,नरसिंह अवतार ,परशुराम अवतार ,श्री राम अवतार,कृष्ण अवतार,कल्कि अवतार इत्यादि। इन्ही से में एक अवतार नरसिंह अवतार है जो होली मनाने का मुख्य कारण है। वो इस प्रकार है-

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प्राचीन काल मे एक बहुत ही गुणी और तपस्वी ऋषि थे। वे पूजा अर्चना में लीन रहते थे। एक बार असुर राजा दक्ष की पुत्री दिति उनसे मिली और उसने उस ऋषि से विवाह की जिद्द की। वह दक्ष की तरह बहुत जिद्दी थी। तब राजा ने उसकी विवाह उस ऋषि से कर दिए। उनका नाम कश्यप था। जब भी ऋषि कश्यप भगवान शिव की पूजा करने जाते तब दिति उसे प्रसंग के लिए जिद्द करती। ऋषि जानते थे कि यह समय ठीक नही है इस समय भगवान शिव भ्रमण के लिए निकलते है। यह समय पाप का समय है।

फिर भी उसके जिद्द के आगे ऋषि को झुकना पड़ा जाता था। जिसके परिणम स्वरूप दिति के दो असुर पुत्र जन्म लिए। जिनका नाम हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप था। उसकी एक पुत्री भी हुई जो होलिका थी। वो भी असुरी थी। ऋषि कश्यप जानते थे कि दोनों पुत्र पराक्रमी होंगे। दोनों की वजह से तीनों लोकों में हाहाकार मच जाएगा। और इनकी मृत्यु ईश्वर के हाथों ही होगी। और ऐसा ही हुआ जब दोनों बड़े हुए तो बड़ा ही पराक्रमी और वीर असुर राजा हुए। जो बहुत ही अहंकारी और घमंडी थे।

एक बार असुर राजा हिरणकश्यप ब्रह्मा जी की तपस्या करके उन्हें प्रशन्न कर देता है। और उनसे वरदान मांग लेता है कि ना तो मैं दिन में मरूँ ना रात में, ना मैं अस्त्र से मरूँ ना शस्त्र से,ना मैं किसी स्त्री के हाथों मरूँ ना किसी पुरूष के हाथों,ना मैं घर के अंदर मरूँ ना घर के बाहर,ना मैं जमीन पर मरूँ ना आसमान में इत्यादि इस प्रकार वरदान पा लेता है। उसी समय उसकी पत्नी गर्भवती रहती है।

जो बाद में चलकर एक पुत्र को जन्म देती है जिसका नाम प्रहलाद था,प्रहलाद का जन्म ईश्वर की कृपा से इस कुल में हुआ था, वो बचपन से ही भगवान विष्णु का परम भक्त बन गया था। उधर राजा हिरण्यकश्यप अपने शक्ति को पाकर अहंकारी बन गया था उसने तीनो लोको पर अपना आधिपत्य जमा लिया था। सारी प्रजा से अपने आप को भगवान कहलवाने लगा उसके डर से सब प्रजा उसे ही भगवान कहने लगे।

विष्णु भगवान को वह अपना शत्रु मानता था क्योंकि भगवान विष्णु ने उसके अहंकारी भाई हिरण्याक्ष को मार था। इसलिए हिरण्यकश्यप किसी भी प्रजा को विष्णु भगवान की पूजा नही करने देता था। सारी प्रजा उससे डर से उसे ही भगवान मानने लगे थे।

लेकिन प्रहलाद पर हिरणकश्यप का कोई प्रभाव न पड़ा, वह हमेशा की तरह भगवान विष्णु का ही भक्ति करता रहा। जिस कारण अपने पिता और राज्य के लिए पितृविरोधी और राज्यविरोधी बन गया। राजा के बहुत मना करने पर भी वह ईश्वर भक्ति का त्याग नही किया ।इसलिए राजा ने दंड देने का निश्चय किया और दंड स्वरूप उसने प्रहलाद को कारागार में डाल दिया उसे खाने में विष दिया फिर भी वह ईश्वर की कृपा से बच गया तब राजा हिरण्यकश्यप ने सांप से कटवाने का प्रयास किया,समुद्र में फेंकवा दिया,हाथी से कुचलवाया,खाई में फेंकवा दिया, खौलते तेल में डाल दिया गया,आग से जलाने का प्रयत्न किया फिर भक्त प्रहलाद भगवान विष्णु की कृपा से बच गया।

तब भगवान विष्णु ने ब्रह्मा जी वरदान को ध्यान में रखते हुए राजा हिरण्यकश्यप को दंड देने का निश्चय कर लिया । एक दिन जब राजा संध्या होने के समय भक्त प्रहलाद को गर्म खम्भे से बांधकर उसे खड्ग से मारने ही वाला था कि खम्भा फाड़कर भगवान विष्णु नरसिंह अवतार (जिसमे सिर सिंह का और शरीर मानव का था) में प्रगट होकर भक्त प्रहलाद की रक्षा करते हैं और संध्या के समय घर के चौखट पर,अपने जांघों पर रखकर,अपने नाखूनों से उसका पेट फाड़कर अंतड़ियां बाहर निकाल देते है। तब हिरण्यकश्यप मार जाता है। गुस्से से व्याकुल नरसिंह भगवान उसके खून से अपने हाथ पैर लाल कर लेते हैं। और खून की होली खेलते हैं। तभी से हर वर्ष होली मनाया जाता है और भगवान नरसिंह की पूजा अर्चना की जाती है।

होलिका दहन क्या है? (What is Holika Dahan?)

जब भक्त प्रह्लाद भगवान विष्णु की कृपा से अपने पिता हिरणकश्यप के सारे दंडो से बच जाता है तब उसकी असुरी बहन होलिका जिसे अग्नि में ना जलने के वरदान प्राप्त था। भक्त प्रह्लाद को लेकर वह राजा हिरणकश्यप की आज्ञा से अग्नि में बैठ जाती है। लेकिन वह यह भूल गई थी कि उसे यह वरदान किसी की रक्षा करने के लिए मिला था,किसी की जान लेने के लिए नही। उसके इसी अहंकार के कारण उसपर से वरदान का कवच हटकर प्रलाद पर आ जाता है और प्रहलाद बच जाता है। उधर होलिका जलकर भस्म हो जाती है।

इस तरह बुराई पर अच्छाई की जीत हो गई। इसलिए आज हम हर वर्ष होलिका दहन मनाकर अपने अहंकार को होलिका रूपी अग्नि में जलाकर भस्म करते है। और ईश्वर से सद्बुद्धि की कामना करते हैं।

होलिका दहन कैसे मनाया जाता है?

चूकिं होली दो दिन तक मनाया जाता है। पहले दिन होलिका दहन मनाया जाता है। इस दिन अपने गांव ,मूहल्ले ,शहर इत्यादि के सियान (सीमा रेखा) पर लोग अपने अपने घरों से लकड़ियां गोबर के खड़े खड़े कंडे,घास फूस,पटाखे इत्यादि इकठ्ठा कर लेते हैं फिर संध्या के बाद होलिका जलाते हैं इसमें लोग अपने पूरे परिवार के सिर से पांव तक चावल से परिक्रमा कराकर उस चावल को होलिका की अग्नि में डालते है।

साथ ही अपने अंदर शुद्धबुद्धि की कामना करते हुए भगवान नरसिंह और अग्नि देव की नारियल ,कुमकुम, अक्षत, जल ,फूल ,अबीर ,गुलाल ,चंदन ,धूप ,दीप इत्यादि से पूजा अर्चना भी करते है । पटाखे ,बम बारूद जलाकर होली की जयकारी भी लगते है। सुबह होने के बाद उस होलिका दहन के राख को एक दूसरे के ऊपर लगाकर प्रथम होली की शुरुआत करते हैं। जिसे धूलकंडी होली कहा जाता है।

होली कब और कैसे मनाया जाता है?

होली प्रत्येक वर्ष के फाल्गुन (फरवरी) महीने के अंतिम दिन यानि कि फाल्गुन महीने के पूर्णिमा (पूर्णवासी) को मनाया जाता है उसके एक दिन पहले होलिका दहन मनाया जाता है। होली भारत के साथ साथ चीन,नेपाल ,भूटान,ऑस्ट्रेलिया ,मॉरिसस इत्यदि और भी अन्य देशों में अपने अपने तरीको से मनाया जाता है। भारत मे होली मनाने का अपना अलग ही विचित्र रूपरेखा है। भारत के हर राज्यो में लोग होली को अनेको प्रकार से अपने तरिके से मनाते हैं।

बहुत सारे राज्यो जैसे राजस्थान महाराष्ट्र,पंजाब इत्यादि राज्यो में फाल्गुन शुक्ल पक्ष चढ़ते ही होली के गीत भजन रात रात भर गए जाते हैं। होली के दिन भी बहुत धूमधाम से एक जगह इकट्ठे होकर एक दूसरे को अबीर गुलाल और रंग लगाकर नृत्य करते हैं। तो कुछ राज्यो जैसे मथुरा,हरियाणा,उत्तरप्रदेश,मध्यप्रदेश इत्यादि राज्यो में लठमार होली खेल जाता है। स्त्री और साथ मे मिलकर लाठी और ढाल के साथ बाजे बजाकर झूमते हुए होली खेलते हैं जिसमे स्त्री पुरुष पर लाठियां चलते हैं और पुरुष उसे ढल से रोकते हैं।

कुछ राज्यो जैसे झारखंड,बिहार,नागपिर,छतीसगढ़,उड़ीसा,असम इत्यादी पूर्वी राज्यो की होली बहुत ही सुंदर दृश्यमान होती हैं। यहां की होली में बच्चे,युवा और बड़े सब अपने से बड़ो को अबीर लगाकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं उन्हें प्रणाम करते हैं। दिनभर लोग होली के भजन और गीत बजाकर गलियों में फेरे लगते है और मिठाई भी बाटते हैं। कही कही पर होली के दिन लोग अपने दामाद को रंग लगाकर गधे पर बैठकर गलियों में घूमाने का अलग ही आनंद लेते हैं इस दिन पुआ,पकवान,जलेबियाँ इत्यादि विभिन्न प्रकार के व्यजंनों का खान पान भी किया जाता है।

भंडारे लगवाए जाते है लोग अबीर गुलाल लगाकर भंडारे का आनंद उठाते हैं। इसमी महिलाएं भी सजधज कर शामिल होती हैं। होली में दिनभर सड़को पर,गलियो में,मुहल्लो में बजे गाजे के साथ बहुत बड़ी रैली भी निकाली जाती है। तो कुछ क्षेत्रों में दिनभर होली खेलने के बाद शाम को लोग एक दूसरे के घर जाते हैं और अबीर के टीके लगाकर अपने से बड़ो को प्रणाम करते है और आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। इस तरह पूरा भारत इस दिन होली के रंग में रंगा जाता है।

होली मनाने का क्या महत्व है?

होली मनाने का बड़ा ही महत्व है। होली के त्योहार बुराई पर से अच्छाई की जीत का प्रतीक के रूप के मनाया जाता है होलिका दहन के दिन एक पवित्र अग्नि जलाकर सभी नकारत्मकता,अहंकार,घमण्ड,और बुराइयों को अग्नि में जलकर भस्म करते हैं। होली का त्योहार अपना एक अलग ही पहचान है। होली हजारों वर्षों से मनाया जा रहा है और मनाया जाता रहेगा। होली के त्योहार में कृष्ण की राश लीला का भी वर्णन किया गया है।

जब बृंदावन की सारी गोपियाँ उसे काला कहकर चिढ़ाती थीं तो एक दिन आज ही दिन कृष्ण ने सारी गोपियों के चेहरे पर काला रंग लगा दिए। इसलिए कृष्ण को भी होली बहुत प्रिय था। इसलिए होली का पूरे भारत मे बड़ा ही महत्व है। होली मनाने का मुख्य उद्देश्य बुराई पर अच्छाई की जीत हासिल करना हैं।

होली से हमे यह सीख मिलती है कि हमे अहंकार और घमंड कभी नही करना चाहिए । अहंकार हमारे अंदर की बुद्धि को भ्रष्ट कर देता है । और हमे पाप करने पर विवश कर देता है ।

होली मनाने का वैज्ञानिक कारण Happy Holi 2020

Happy Holi 2020 होली मनाने का वैज्ञानिक कारण यह है कि होली से पहले शीत ऋतु रहता है और गर्मी का मौसम शुरू होने वाला होता है इस दौरान मौसम के परिवर्तन होने के कारण शरीर पर अनेको प्रकार के संक्रमण का असर होने लगता है जैसे- हैजा, मलेरिया,खसरा,चर्मरोग,चेचक इत्यादि।

इन संक्रमण को जड़ से खत्म कर देने लिए होलिका दहन मनाया जाता है रात को एक साथ पूरे भारत मे सारे जगहों पर होलिका जलाने से वायु मण्डल में मौजूद कीटाणु नष्ट हो जाते है और हमे कोई बीमारी नही होती साथ ही होलिका के परिक्रमा करने से हमारे शरीर मे 40 % फ़ारेनहाइट ऊर्जा अवशोषित होती है जिस कारण कीटाणु का हम पर कोई असर नही होता है।

और यदि संक्रमण पैदा करने वाले कीटाणु हम पर हावी भी होते हैं तो वे हमारी ऊर्जा से टकराकर स्वयम नष्ट हो जाते हैं। इस प्रकार सांस्कृतिक और वैज्ञानिक दोनों ही दृश्टिकोण से होली मनाने का का बहुत बड़ा महत्व है।

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